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इन हैवानों का क्या करें!

आये दिन होने वाले दुराचार और दुष्कर्मों की खबरों से हम सभी दो चार होते रहते हैं। लेकिन अब हेवानियत की सारी हदें पार होती जा रही हैं। लोगों में इस कदर सेक्स की हवस हावी होती जा रही है कि वो मासूम बच्चियों को अपना शिकार बनाने से भी नहीं चूक रहे हैं। आमतौर पर यह बच्चियां मनचलों व दबंगों की शिकार बनती थी। लेकिन अब तो शिक्षण व अध्यापन से जुड़े लोगों ने सारी हदें पार कर दी हैं। हमारी परंपरा में गुरु को ईश्वर से ऊपर स्थान दिया गया है। आज उन्हीं अध्यापकों का चरित्र इतना गिर गया है कि वो मासूम बच्चियों को अपनी हवस का शिकार बना रहे हैं।

ऐसे परिवेश में तो कोई भी किसी टीचर पर विश्वास नहीं करेगा। वैसे भी हमारे समाज में लड़कियों के साथ काफी सौतेला बर्ताव किया जाता है। घर के बाहर स्कूलों में वो अब सुरक्षित नहीं रह गयी हैं। सालों-साल घर वाले मुकदमा लडते हैं और इसके बाद आरोपी कुछ सालों की सजा पाते हैं। दबंग और संपन्न लोग अदालत की आंखों में धूल झोंक बरी भी हो जाते हैं। आंकड़े बताते हैं कि मासूम बच्चियों के साथ हैवानियत करने वाले उनके करीबी होते हैं। जिनके बारे में बच्चियां खुलकर अपने घर वालों को कह भी नहीं पाती हैं।

बता दें कि राजस्थान के बीकानेर जिले के नोखा इलाके में ऐसा मामला सामने आया जिससे लोगों की आंखें फटी की फटी रह गयीं। एक प्राइवेट स्कूल के आठ टीचरों ने मिलकर 13 साल की बच्ची के सामूहिक बलात्कार किया और उसका वीडियो बना डाला। उस वीडियो के जरिये इस बच्ची का यौन शोषण लगातार दो साल तक किया गया। यह घटना लगभग 3 साल पहले की है। नोखा के साजनवासी गांव स्थित सरस्वती शिक्षण संस्थान में अश्लील वीडियो के खुलासा करने की धमकी पर उस बच्ची के साथ अनेक बार इन शिक्षकों ने अपनी हवस का शिकार बनाया।

परेशान हो जब लड़की इसका विरोध किया तो इन हैवानों ने उसे जान से मारने की धमकी तक दे डाली। इसी बीच वह बच्ची गर्भवती हो गयी। तब इन टीचरों ने उस बच्ची को गर्भ निरोधक दवायें खाने पर मजबूर किया गया। इसका असर यह हुआ कि उस लड़की को कैंसर हो गया। जब लड़की के घर वालों को इस मामले का पता चला तो उन्होंने स्थानीय पुलिस थाने में मामला दर्ज कराया है। पुलिस ने इन आठों टीचर्स के खिलाफ पाक्सो समेत कई गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया गया है। मामला दर्ज होने से क्या उस मासूम को न्याय मिल सकेगा। उन तकलीफों को क्या वो भुला पायेगी जो इन दरिंदों ने उसे काफी समय तक दी है।
विनय गोयल के विचार

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