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कठुआ रेप केस की आशिफा को श्रद्धांजलि- नन्हीं परी न जाने क्यूं बेजान हो गयी

ना जाने क्यूँ आज वो चुप सी हो गई,
कौन से दर्द मे वो निशब्द हो गयी।
पापा का परी थी वो माँ की आंखों का तारा,
दादा की गुड़िया थी वो पूरे घर की रौनक
न जाने क्यूँ वो आज चुप सी हो गयी ।
बिखरते हुए बालों को बड़ी प्यार से सजाते थे पापा,
पर आज अपनी परी की जमीन मे बिखरे बालों को।
देख कर भी ना जाने क्यूँ पापा आज निशब्द हो गए।
न जाने क्यूँ आज ओ चुप सी हो गयी।
जरा सी चोट लाग्ने पर पूरे घर मे हड़कंप मचनेवाली,
ये हमारी गुड़िया ना जाने क्यूँ आज दर्द मे निशब्द हो गयी।
पता नहीं क्यूँ आज ओ चुप सी हो गयी,
दादाजी से कहानी बिना सुने आज हमारी ये गुड़िया।
पता नहीं आज कौनसी गहरी नींद मे सो गयी,
अपनी आंखों के सामने अपनी लाड़ली का निष्प्राण चेहरा देख।
मां का शरीर आज बेजान हो गया,
ना जाने क्यूँ ओ चुपसी हो गयी।
हे अदृश्य शक्ति आज तू उत्तर दे,
ना जाने किन गुन्हों ने हमारी प्यारी गुड़िया को।
अपनी हवस का शिकार बना लिया,
ना जाने क्यूँ नन्हीं परी चुपसी हो गयी।
……. पुण्यप्रभा

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