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बिखरने के कगार पर जा रही है आम आदमी पार्टी

नयी दिल्ली। देश की राजधानी दिल्ली में सरकार चला रही आम आदमी पार्टी की सरकार को लगभग साढ़े तीन साल हो रहे हैं। पार्टी से दिग्गज नेताआंें का पार्टी से मोहभ्ंाग होता जा रहा है। हाल ही में 15 अगस्त के आस पास पत्रकार से राजनीति मंे आये आशुतोष ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया। सूत्र बताते हैं कि पार्टी में उनकी भूमिका कुछ खास अहमियत नहीं थी। लेकिन उन्होंने पार्टी छोड़ने की वजह निजी बताते हुए इस्तीफा देने की बात कही हैै। इसी कड़ी में एक और पत्रकार आशीष खेतान के पार्टी से किनारा करने की खबर भी चर्चा में है। खेतान ने भी यह कह कर पल्ला झाड़ लिया कि वो अपनी लीगल पै्रक्टिस को जमाना चाह रहे हैं इसलिये सक्रिय राजनीति में हिस्सा नहीं ले रहे हैं। सूत्र बताते हैं कि उन्होंने भी आशुतोष के साथ ही अपना इस्तीफा पार्टी कार्यालय में दे दिया था।

आशुतोष राज्य सभा में जाने को इच्छुक के थे लेकिन पार्टी ने उनको नजर अंदाज करते हुए संजय सिंह, एनडी गुप्ता और सुशील गुप्ता को राज्यसभा का सदस्य बना दिया। इससे आशुतोष अंदर ही अंदर काफी नाराज थे। 2014 के आम चुनाव में आशुतोष दिल्ली से चुनाव लड़ चुके हैं। उन्हें उम्मीद थी कि पार्टी राज्यसभा का सदस्य बनवा सकती है। लेकिन पार्टी ने उनकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया। आशीष खेतान भी पिछल आम चुनाव में दिल्ली से ही प्रत्याशी थे आगामी आम चुनाव में भी वो पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ने की इच्छा रख रहे हैं लेकिन पार्टी ने फिलहाल उनकी बात पर विचार नहीं किया। इससे निराश हो खेतान ने पार्टी से किनारा करना ही बेहतर समझा और अन्य व्यवसाय में ही अपना ध्यान लगाने की बात कर रहे हैं।

इससे पहले पार्टी के संस्थापक सदस्य कुमार विश्वास ने भी राज्यसभा जाने में दिलचस्पी दिखाई थी लेकिन पार्टी ने भी उन्हें राज्यसभा भेजने में दिलचस्पी नहीं दिखाई। लिहाजा विश्वास भी पार्टी के खिलाफ बयान बाजी करने लगे। मीडिया में खुलकर केजरीवाल और अन्य बड़े नेताओं के खिलाफ जमकर कटाक्ष करने से बाज नहीं आये लिहाजा पार्टी ने उन्हें मेनस्ट्रीम पाॅलिटिक्स से किनारे कर दिया। पार्टी ने उन्हें राजस्थान प्रभारी बना कर वहां चुनाव लड़वाने की बागडोर सौंपी थी। लेकिन उनकी पार्टी विरोधी हरकतों से नाराज शीर्ष नेताओं ने उन्हें राजस्थान प्रभारी पद से हटा दिया। पार्टी के फैसले से नाराज विश्वास अब खुलकर अरविंद केजरीवाल एण्ड कंपनी पर जमकर हमला बोलने लगे। पार्टी के एक अन्य विधायक व पूर्व मंत्री कपिल मिश्रा भी बागी नेता है जिन्हें सरकार ने मंत्री पद से हटा दिया था। वो भी सरकार और पार्टी के खिलाफ जमकर मोर्चा संभाले हुए हैं। उनके निशाने पर प्रमुख रूप से केजरीवाल, सतेंद्र जैन और पार्टी के बड़े नेता रहते हैं। वैसे उनकी मुलाकातें भाजपा के बड़े नेताओं से काफी देखी गयी है। पार्टी ने उन्हें निष्कासित कर रखा है। अगामी आम चुनाव में वो भाजपा की गोदी में बैठने को तैयार नजर आ रहे है। इसके अलावा पार्टी के दो दर्जन विधायकों पर मामले कोर्ट में चल रहे हैं।

इससे पहले भी सरकार बनने के कुछ समय बाद ही पार्टी के संस्थापक सदस्य योगेंद्र यादव, प्रो. आनंद कुमार और प्रशांत भूषण को पार्टी ने संदिग्ध हरकतों के चलते पार्टी से निकाल दिया था। हाल ही में पार्टी ने पंजाब के प्रभारी व प्रतिपक्ष नेता सुखपाल खैरा को पद से हटा दिया था लेकिन उनके समर्थकों ने प्रभारी की मान्यता दे दी है। आगामी आम चुनाव के कुछ ही माह बचे हैं ऐसे में पार्टी के हालात दिन ब दिन खराब होते जा रहे हैं। पार्टी ऊपरी मन से कह रही है कि आॅल इज वेल। लेकिन सूत्र बता रहे हैं कि पार्टी में आल इज नाॅट वेल।

विनय गोयल की रिपोर्ट

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