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अलेप्पो : एक शहर जो बर्बाद हो गया….

एक शहर जो कभी वर्ल्ड हेरिजेट सेंटर  में शुमार था, वो आज बर्बादी की ऐसी कगार पर पहुंच चुका हैं जहां लोगों को अपनी जान बचना भी मुश्किल हो गया है। कुछ साल पहले तक लोग इस शहर की सभ्यता और संस्कृति की मिसालें दिया करते थे, मगर आज यहां कोहराम मचा हुआ हैं। 6 हज़ार  साल से भी पुराना शहर मलबे के ढ़ेर में तब्दील हो गया है और आलम यह है कि हर तरफ चीख-पुकार मची हुई है। पिछले पांच साल से चल रहे गृहयुद्ध के चलते यह शहर बर्बाद हो गया, यहां की विरासत खत्म हो गई, सभ्यता खत्म हो गई, अगर कुछ बचा है तो सिर्फ एक नाम। यह शहर अपनी विरासत समेट चुका है। लोगों को अपना घर भी अब सुरक्षा नहीं दे पा रहा है। चारों तरफ से हो रहे बमबारी में सबकुछ तबाह हो गया, बर्बाद हो गया। सड़कों पर लाशें बिखरी पड़ी हैं, हजारों लोग रोज मारे जा रहे हैं आखिर क्यों, उनका गुनाह क्या हैं उनका कुसूर क्या है।

पिछले चार सालोंaleppo-5 स यहां की सेना सरकार के लिए लड़ रही हैं और रुस उसका साथ दे रहा हैं। अहम बता यह है कि सेना अपने ही नागरीकों को पर गोलियां बरसा रही हैं, आखिर क्यों। इन्हीं चार सालों में वहां की सेना ने विद्रोहियों को खत्म करने के नाम पर चार लाख से ज्यादा लोगों को मार दिया, और ये काम अब भी जारी है। बताया जाता है की जब बशर अल असद के खिलाफ पूरे देश में विरोध हो रहा था तब अलेप्पो के लोग असद के समर्थन में थे। बाद में विद्रोही अलेप्पो आये और उसे अपना गढ़ बना लिया। सीरियाई सेना को विद्रोहियों से शहर को खाली करना में चार साल लग गए, इन चार साल ने एक शहर को बर्बाद कर दिया, यहां की संस्कृती मिटा दी, और सभ्यता को खत्म कर दिया। इन चार सालों ने अलेप्पो से वो सब कुछ छीन लिया जिसके लिए ये शहर जाना जाता था।

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कहा जा है कि किसी भी चीज के बनाने में बहुत वक्त लगता है मगर उसे खत्म करनें के लिए चंद मिनट काफी होते हैं। अलेप्पो के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ, जिस शहर को अपनी पहचान बनाने में 6300 साल लग गए, उसे चंद सत्ता के लालची लोगों ने महज कुछ वर्षो में बर्बाद कर दिया। अलेप्पो में जारी जंग का अंत कब होगा ये कहा नहीं जा सकता, दोबारा से अलेप्पो अपनी पहचान बना पायेगा की नहीं ये कोई नहीं जानता। जो लोग वहां के सत्ता के लिए मासूमों की कत्ल किए जा रहा हैं, उन्हें वहां की शत्ता मिलेगी की भी नहीं कुछ कह नहीं सकते। मगर लोग-लोग को मार रहे हैं, बिना कुछ सोचे समझे, इंसान-इंसान का कत्ल किए जा रहा हैं।aleppo-2

सीरिया सरकार ने हाल ही में एक बयान जारी कर कहा कि अलेप्पो शहर के पूर्वी हिस्से को विद्रोहियों से मुक्त करा लिया गया हैं अब वहां से लोगों को निकालने का कार्य जारी हैं। मगर संयुक्त राष्ट्र का कहना हैं कि रूस और ईरान की सेना ने वहां के नागरिकों को खड़ा करके गोली से उड़ा दिया। अलेप्पो में जारी जंग किसके कारण हो रही है ये सब जानते है, जब भी दो महाशक्तियां अपनी ताकत संप्रभुता दिखाने के लिए तत्पर हो जाए तो ऐसा हि कुछ नजारा देखने को मिलता हैं, पिछले कई वर्षों इन महाशक्तियों ने ना जाने कितने देश उजाड़ दिए, कितने घरों को बर्बाद कर दिया, कितने मासुम जिंदगियां मौत के मुंह में समा गई और ये खेल बदस्तूर जारी है। अलेप्पो के निवासी ट्विट कर लोगों से गुहार कर रहे है कि मासुमों की जिंदगीयो को बचा लो, शहर को बर्बाद होने से बचा लें। लोग गुहार कर रहे है कि संयुक्त राष्ट्र पर भरोसा मत करो, अंतर्राष्ट्रीय समुदाय पर भरोसा मत करो।

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तकरीबन छ: साल पहले जब अरब स्प्रिंग के साथ पूरे सीरिया में असद के तानाशाही के खिलाफ बगावत हुआ था, उसेक एक साल बाद अलेप्पो मे बगावत हुआ था, विद्रोहीयों को तो खत्म कर दिया गया, मगर इन महाशक्तियों ने उनेक जगह आंतकवादी गुट खड़ा कर दिए, और उनको खत्म करने के नाम पर युद्ध जारी रखा। कोई इन्हें खत्म करने के नाम पर बम बरसाता रहा, तो कोई इन्हें लड़ने के लिए फंड देता रहा, और इन सब के बीच बर्बाद होता रहा एक शहर वहां के लोग। ये महाशक्तियां आतंकीयों के मारने के नाम पर भीषण नरसंहार जारी रखा।

aleppo-3अलेप्पो में मारे जा रहें नागरिकों की खबर मीड़िया में आने के बाद एक दूसरी ही युद्ध छिड़ गया हैं। किसी पे आरोप लगाया जा रहा है कि लोगों के मारे जाने को लेकर ये लोग आतंकीयों का समर्थन कर रहे हैं तो किसी पर आरोप लगता है कि वो अमेरिका और सऊदी के हितों के लिए बढ़ा-चढ़ा के पेश कर रहे हैं। अमेरिकी मीड़िया कुछ और कहता है रूस की मीड़िया कुछ और कहता हैं, इनके अलावा भी लोग सोशल मीड़िया पर कुछ और कहते हैं। अब भी अलेप्पो निवासीयों को निशाना बनाया जा रहा है, तहखाने में छिपे बच्चों महिलाओं का कत्लेआम जारी हैं। कोई लोकतंत्र के नाम पर अमेरिका का समर्थन कर रहा है तो कोई लेफ्ट के नाम पर असद और उसके समर्थक रूस का समर्थन कर रहा हैं, लेकिन उन आम लोगों की जिंदगी को समर्थन कोई नहीं कर रहा जिन्हे बिना किसी कुसूर के मारा जा रहा है।

लेखक लव कुमार के अपने निजी विचार……

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