Breaking News
Home / देश / सभी हाइकोर्ट पॉस्को एक्ट के तहत लंबित मामलों की सूची सौंपें : सुप्रीम कोर्ट
sc of india

सभी हाइकोर्ट पॉस्को एक्ट के तहत लंबित मामलों की सूची सौंपें : सुप्रीम कोर्ट

नयी दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने सभी हाइकोर्ट से कहा है कि पॉस्को एक्ट के तहत लंबित मामलों की सूची सौंपें. याचिकाकर्ता ने कोर्ट को बताया कि 2006 तक एनसीआरबी आंकड़ों के मुताबिक बच्चों के साथ यौन अपराध के 89प्रतिशत मामले लंबित हैं। 2017 तक के आंकड़ें एनसीआरबी मुहैया नहीं करा रहा है। लेकिन अब तक ज़रूर ये आंकड़ा 90% पार कर चुका होगा।

एनसीआरबी के मुताबिक पॉस्को एक्ट के तहत दर्ज 101326 मामलों में 11 हज़ार का ही निपटारा हुआ है। 90205 मामले लंबित ही हैं। कोर्ट में अगली सुनवाई 28 अप्रैल को होगी। याचिकाकर्ता ने कहा कि पॉस्को एक्ट के तहत दोषी को सज़ा ए मौत का प्रावधान हो. इस पर कोर्ट ने कहा कि आप इस मामले में अपनी सीमा रेखा में ही रहें।

दिल्ली में 8 महीने की बच्ची के साथ यौन शोषण के मामले में सुप्रीम कोर्ट सुनवाई कर रहा है। पिछली सुनवाई में कोर्ट ने केंद्र सरकार से पूछा कि पॉस्‍को के मामले के तहत जांच पूरी करने में कितना वक्त लगना चाहिए। कोर्ट ने केंद्र और याचिकाकर्ता से पूछा कि को पॉस्‍को एक्ट के तहत देश भर में कितने ट्रायल लंबित हैं?

वहीं केंद्र सरकार ने कोर्ट को बताया था कि बच्ची को एम्स में भर्ती किया गया है और उसका पूरा ध्यान रखा जा रहा है. सरकार ने कहा कि 75 हजार रुपये का मुआवजा तुरंत बच्ची के घरवालों को दिया गया है।

एम्स के दोनों डॉक्टरों की रिपोर्ट में कहा गया कि बच्ची की सर्जरी की गई थी और अब वह बेहतर है. इससे पहले कोर्ट ने आदेश दिया था कि एम्स के दो डॉक्टर बच्ची की जांच करेंगे और जरूरत पड़ने पर एम्स में भर्ती करेंगे. बुधवार को सुप्रीम कोर्ट ने चिंता जाहिर करते हुए केंद्र सरकार को एम्स के दो उपयुक्त डॉक्टरों को कलावती शरण अस्पताल जाकर बच्ची का मुआयना करने के आदेश दिए थे।

कोर्ट ने कहा था कि डॉक्टरों के साथ स्पेशल एंबुलेंस भी जाएगी और डॉक्टरों को लगेगा तो बच्ची को एम्स में तुरंत भर्ती किया जाएगा। कोर्ट ने कहा कि इस दौरान दिल्ली लीगल सर्विस अथॉरिटी का सदस्य भी मौजूद रहेगा। सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि उम्मीद है कि बच्ची के मां पिता सहयोग करेंगे।

अलख आलोक श्रीवास्तव द्वारा दाखिल याचिका में कहा गया है कि बच्ची के पिता मां गरीब हैं तो तुरंत अच्छी मेडिकल सुविधा दिलाई जाए। दस लाख रुपये मुआवजा दिया जाए. सुप्रीम कोर्ट ने एक केस में दस साल तक की बच्चियों से रेप के मामले में कड़ी सजा हो अब कोर्ट को ऐसे मामलों में 12 साल की बच्ची के साथ रेप में छह महीने में ट्रायल पूरा करने और मौत की सजा देनी चाहिए।

विनय गोयल की रिपोर्ट

Next9news

 

Check Also

accident_onedeath

एक तरफ झण्डा रोहण दूसरी ओर मौत का मातम

नयी दिल्ली।बुधवार की सुबह सारा देश स्वतंत्रता दिवस के समारोह की तैयारी में जुटा था। …