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Sad-Shayari

… और लोग इसे मेरी, औकात समझ बैठे

बहुत सोचना पड़ता है,
मुंह खोलने से पहल।

क्योंकि अब दुनिया दिल से नहीं,
दिमाग से रिश्ते निभाती है।

रिश्ते संजोने के लिये मैं,
झुकती हमेशा ही रही।

और लोग इसे मेरी,
औकात समझ बैठे।

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… दीपिका टंडन

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