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यूपी में अखिलेश माया व राहुल के जाल में फंसेगी बीजेपी

नयी दिल्ली। यूपी आजकल देश विदेश में चर्चा का विषय बनता जा रहा है। फिलहाल सत्ताधारी दल के विधायक पर एक लड़की रेप का आरोप लगाया है। मीडिया में इस मामले के तूल पकड़ने पर यूपी सरकार के आलाधिकारी और तंत्र ने काम करना शुरू कर दिया है। इसी बीच पीड़िता के पिता की पुलिस हिरासत में हत्या भी कर दी गयी है। पीडिता के परिजनों ने इस हत्या में भी बांगरमऊ के विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को जिम्मेदार ठहराया है। योगी सरकार अभी अपनी एक साल की सरकार के लिये जश्न मना रही थी। अचानक इस मामले ने योगी और उनके मंत्रियों की नींद उड़ा दी है।
दिलचस्प बात यह है कि मोेदी सरकार कार्यकाल का आखिरी साल चल रहा है। 2019 में आम चुनाव होना है यूपी में बीजेपी को चमत्कारी बहुमत प्राप्त हुआ। लेकिन आज के हालात देखते हुए लग रहा है कि आम चुनावों में भाजपा को अपना रसूख और साख दोनों बचाना होता दिख रहा है। हाल ही में हुए उपचुनावों में भाजपा को मुंह की खानी पड़ी है। यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ अपनी ही सीट बचाने में विफल हुए।

इतना ही नहीं यूपी के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य की सीट भी भाजपा से छिन गयी। दोनों ही जगह सपा के उम्मीदवार भारी मतों विजयी हुए हैं। इन दोनों जगहों पर समाजवादी पार्टी का समर्थन बहुजन समाज पार्टी ने किया। इन दोनों धुर विरोधी पार्टियों के गठबंधन से भाजपा को अपने ही गढ़ में मुंह की खानी पड़ी। गोरखपुर और फूलपुर संसदीय क्षेत्र में भाजपा के सांसद थे। उपचुनावों में मिली अभूतपूर्व विजय ेसे सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव और बसपा सुप्रीमो मायावती की बांछें खिली हुई है। भाजपा हार से तिलमिला कर सपा बसपा के गठबंधन को स्वार्थ का गठबंधन बता कर अपनी खीझ उतार रही है। सप बसपा ने विरोधियों की आलोचना को सिरे से नकारते हुए यह ऐलान कर दिया है कि आगामी आम चुनाव में भी यह गठबंधन कायम रहेगा। दोनों ही दल आगामी आम चुनाव में भाजपा को मात देने के लिये रणनीति तय करने में लगे है। इससे पहले भी मुलायम सिंह व मायावती के बीच राजनीतिक तालमेल किया जा चुका है। मुलायम सिंह भी इस गठबंधन पर अपनी सहमति दे दी है।

यूपी में योगी सरकार के बनने के बाद बांगरमऊ के विधायक कुलदीप सिंह संेगर के खिलाफ एक स्थानीय युवती ने विधायक आवास पर बतात्कार करने का आरोप लगा दिया था। लेकिन मामला सत्ताधारी दल के विधायक का था। इसलिये स्थानीय प्रशासन और पुलिस ने दबा दिया। इस बीच विधायक के भाई अतुल सिंह और उनके गुर्गों ने पीड़िता के परिजनों मामला रफा दफा करने के लिये दबाव बनाया ऐसा करने पर अंजाम भुगतने की धमकी दी। एक साल बीतने के बाद भी बांगरमऊ पुलिस और प्रशासन ने पीड़िता की शिकायत पर मामला दर्ज नहीं किया तो परिजनों ने यूपी के आला अफसरों और सरकार के आगे गुहार लगानी शुरू कर दी। इस बीच पीड़िता के पिता पर विधायक के भाई और उसके गुण्डों ने मारपीट की। जब मामला स्थानीय पुलिस के पास पहंुचा तो पीड़िता के पिता को ही झूठे मामले में फंसा कर हवालात में बंद कर दिया। वहीं हवालात में पीड़िता के पिता की संदिग्ध हालात में मौत हो गयी। पोस्ट मार्टम रिपोर्ट में खुलास हुआ कि मृतक के शरीर पर 14 गंभीर चोटों के निशान मिले हैं। इस वारदात के बाद से ही मामले ने मीडिया ने प्रमुखता से ध्यान दिया और मामला पूरे देश में गरमा गया। इससे यूपी सरकार और योगी की खुमारी टूटी और उन्होंने विधायक को तलब किया, लेकिन विधायक की गिरफ्तारी के आदेश नहीं दिये गये। विधायक विधानसभा और मंत्रालयों में बेधड़क हेकड़ी दिखाता घूम रहा है। मामला तूल पकड़ता देख पुलिस ने आधा दर्जन लोगों समेत विधायक के भाई अतुल सिंह को दबोच लिया है। दिलचस्प यह है कि शिकायत में अतुल सिंह का नाम था लेकिन पुलिस ने अपनी रिपोर्ट में उसका नाम दर्ज नहीं किया। इससे साफ जाहिर है कि पुलिस पर विधायक की दबंगई का कितना प्रभाव है।

यूपी के ताजा हालात देखते हुए लग रहा है कि आगामी आम चुनाव काफी दिलचस्प होने वाला है। एक सर्वे के अनुसार सपा-बसपा के गठबंधन को 45 से पचास सीटें मिलने की उम्मीद है। कांगे्रस की हालत में भी सुधार बताया गया है। इस सर्वे में बीजेपी को 27 से 30 सीटें मिलने का अनुमान बताया है।

विनय गोयल की रिपोर्ट

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