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बीजेपी की साख खतरे में!

दिल्ली में एमसीडी के चुनावों की धमक सुनाई पड़ने लगी है। बीजेपी, आम आदमी पार्टी और कांग्रेस इस चुनाव में वर्चस्व की लड़ाई के लिये कमर कस चुके हैं। यहां दिल्ली की सत्ता पर आम आदमी पार्टी का कब्जा है। एमसीडी पर कब्जा करने के लिये केजरीवाल सरकार एड़ी चोटी का जोर लगा रही है। वहीं कांग्रेस और भाजपा के लिये दिल्ली के दो आम चुनाव नुकसानदायक साबित हुए हैं। कांग्रेस का तो एक भी उम्मीदवार विधानसभा तक पहुंचने में विफल रहा है।

वहीं भाजपा के मात्र तीन उम्मीदवार ही विधायक बन सके हैं। बीजेपी और कांग्रेस के लिये यह चुनाव प्रतिष्ठा का बन चुका है। पिछले एक दशक से एमसीडी पर भारतीय जनता पार्टी कब्जा रहा है। लेकिन आम आदमी पार्टी एमसीडी के उपचुनाव 2016 में 13 में 5 सीटों पर जीत हासिल की थी। सबसे ज्यादा नुकसान भारतीय जनता पार्टी को हुआ है। भाजपा यूपी की तरह दिल्ली में भी हिन्दुत्व का कार्ड खेलने की तैयारी में है इस लिये यूपी के सीएम योगी को स्टार प्रचारक बनाया गया है। केन्द्रीय मंत्रियों, फिल्मी कलाकारो और खिलाड़ियों को भी प्रचार के लिये जुटाया जा रहा है। अब देखना यह है कि भाजपा का जादू दिल्ली में चलेगा या आम आदमी पार्टी की झाड़ू एक बार फिर से दिल्ली को रास आयेगी।

2014 में भाजपा ने लोकसभा चुनाव में प्रचंड बहुमत प्राप्त कर विपक्षियों को धूल चटा दी। देश की कमान नरेंद्र मोदी के हाथ में आयी और उनके मैजिक का प्रभाव हरियाणा, महाराष्ट्र, झारखंड साफ देखने को मिला। हरियाणा में भाजपा की पहली बार सरकार बनी। भाजपा ने इसका श्रेय पीएम मोदी की छवि व अमित शाह के नेतृत्व को दिया। लेकिन दिल्ली में हुए विधानसभा चुनाव में न मोदी मैजिक काम आया और न ही अमित शाह की कूटनीति। यहां पर मतदाताओं ने आम आदमी पार्टी को ऐतिहासिक बहुमत दिया। कांग्रेस तो कोमा में आ गयी। दिल्ली में केजरीवाल के नेतृत्व में आम आदमी पार्टी की सरकार का गठन हुआ।

लेकिन केन्द्र व दिल्ली सरकार के बीच देवरानी और जिठानी की नांक झोंक का दौर शुरू हो गया जिससे दिल्लीवासियों को परेशानी का सामना करना पड़ा। भाजपा ने आम चुनाव में प्रचार के दौरान स्पष्ट कहा था कि अगर दिल्ली में हमारी सरकार बनी तो दिल्लीवासियों की समस्याओं का समाधान करने में कोई परेशानी नहीं होगी। इससे साफ जाहिर होता था कि किसी अन्य पार्टी की सरकार दिल्ली में आयी तो दिल्लीवासी परेशानियों को झेलने को तैयार रहें। ऐसा हुआ भी केन्द्र व दिल्ली सरकार की लड़ाई में दो साल के भीतर आधा दर्जन बार कूड़े और गंदगी के अंबार से जूझना पड़ा।

बीजेपी उस हार को शायद आज भी भुला न पायी है। यही वजह है कि इस चुनाव को उसने प्रतिष्ठा का सवाल बना लिया है। पार्टी ने इस बार भाजपा नेताओं के साथ झारखंड, यूपी गोवा, मणिपुर, उत्तराखंड, हरियाणा, छत्तीसगढ़ असम, महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश और राजस्थान के मुख्यमंत्रियों को भी प्रचार में उतारने का मन बनाया है। हाल में हुए यूपी के चुनाव में प्रचंड बहुमत मिलने से पार्टी के हौसले काफी बुलंद हैं। उप्र में भाजपा ने धु्रवीकरण को हथियार बना कर हिन्दुओं के वोट पार्टी के पक्ष में कराने में सफलता पायी जिसमें योगी की अहम् भूमिका रही जिसे देखते हुए उन्हें यूपी की कमान भी सौंप दी गयी।

विनय गोयल के विचार

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