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बीजेपी का दलित प्रेम

हाल में पांच प्रदेशों में आम चुनाव हुए जिनमें काफी फायदा मिला है। इससे पहले भी पश्चिम बंगाल में भी बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने एक दलित परिवार के घर पर भोजन कर यह संदेश देने का प्रयास किया कि भाजपा केवल सवर्णां की पार्टी नहीं है। वहां दलित लोगों को भी सम्मान दिया जाता है। भले ही उनके इस दलित प्रेम का राजनीतिक फायदा नहीं मिला है। हाल ही हुए वेस्ट बंगाल में हुए नगर निकाय के चुनाव में एक बार फिर ममता दीदी का जलवा दिखा। बीजेपी को एक बार फिर करारा हार का सामना करना पड़ा। उन्हें मात्र तीन सीट पर ही सफलता मिली। एक बात समझ में नहीं आती है कि बीजेपी के नेताओं को ऐन चुनाव के वक्त पर ही दलित लोगों के प्रति प्रेम जागता है।

यूपी में चुनाव प्रचार के दौरान बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने दलितों के घर पर खाना खाकर यह संदेश देने की कोशिश की थी कि भाजपा में दलित के लिये कोई भेदभाव नहीं है। शायद इसी बात का यूपी में भाजपा को काफी हद तक वोटों का फायदा हुआ है। लेकिन यह फार्मूला कर्नाटक भाजपा नेता को काफी महंगा साबित होता दिख रहा है। कर्नाटक में बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष बीएस येदुरप्पा व अन्य नेताओं के खिलाफ कुछ दलित लोगों ने पुलिस में शिकायत की है।

मालूम हो कि कर्नाटक बीजेपी अध्यक्ष बीएस येदुरप्पा व अन्य नेता प्रदेश बीजेपी को मजबूत करने का प्रयास कर रहे हैं। इसी क्रम में इन लोगों ने अमित शाह की तर्ज पर दलितों के घर पर खाना खाने का कार्यक्रम चलाया। लेकिन इस कार्यक्रम के दौरान बीजेपी नेताओं दलित परिवारों ने स्थानीय थाने में यह शिकायत दर्ज करायी है कि उपरोक्त नेताओं उनके घर पर खाना खाने के कार्यक्रम के दौरान होटल से नाश्ता मंगवा कर खाया था।

विनय गोयल के विचार

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