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जब पाठशालाआें पर भारी पड़ी अंग्रेजी हुकूमत

school

इस देश में शिक्षा तो उसी दिन राज-व्यवस्था के हाथ का खिलौना बन गयी, जिस दिन स्वायत्त पाठशाला व्यवस्था को भंग करने के लिए ब्रिटिश कम्पनी हुकूमत ने अंग्रेजी केन्द्रित स्कूली व्यवस्था की नीव डाली थी । स्कूली और विश्वविद्यालयी शिक्षा का वर्तमान ढाँचा कम्पनी एवं ब्रिटिश राज में खड़ा …

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थोड़ी प्रूफरीडिंग-एडिटिंग के साथ पुनः सुबह की पोस्ट…..

dhanteras

भारत के उन 15 लोगों को जिनके पास देश की आधी सम्पत्ति है, धनतेरस के बाद, धन की देवी लक्ष्मी के पूजन की बधाईयाँ। बाकि ‘धन को तरसते’ भारत वासियों को धन-तरस के बाद दीवाली की मिठाइयाँ और साथ में “जुमलों की फुलझड़ी”, शुभकामनाओं के साथ| हम प्रार्थना के साथ …

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शासन व्यवस्था को मजबूत करने की जरूरत

law

लोकतंत्र में शासन में जनता की सहभागिता तभी आ सकती है जब शासन व्यवस्था जन-भाषाओं में संचालित हो। इंग्लैंड समेत सम्पूर्ण यूरोप में लोकतंत्र के विकास के साथ वहाँ की जनभाषाएं शासन प्रशासन और शिक्षा का हिस्सा बनी। इसे भी पढ़े : युद्ध किसी भी समस्या का समाधान नहीं होता …

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युद्ध किसी भी समस्या का समाधान नहीं होता

war

युद्ध हमेशा से पूंजीपतियों के पक्ष में होता है। पहले युद्ध की तैयारी के नाम पर संसाधनों को युद्ध सामग्री खरीदने पर खर्च किया जाता है। जिसका फायदा इसे बनाने से लेकर इसकी दलाली में लगे सटोरियों को होता है। गलती से युद्ध हो जाये तो सट्टे बाज जरूरी सामानों …

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लड़ना है तो कुपोषण और गरीबी से लड़े

poor

अमेरिका और कैनेडा के बॉर्डर पर एक भी सैनिक नहीं है। यही स्थिति अब यूरोपियन यूनियन के देशों की भी है |  इन देशों में अनेकों मकान ऐसे है जिनका एक हिस्सा एक देश में तो दूसरा दूसरे में | सोते वक्त सर कनाडा में तो पाँव अमेरिका |  इसी …

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अंग्रेजी स्कूलों से गुजरता हुआ सरकारी भविष्य?

child

आज स्थिति ये हो गई है कि सरकारी नौकरी की चाहत रखने वाला या सरकारी नौकरी में सेवारत व्यक्ति अपने बच्चों को निजी इंग्लिश मीडियम स्कूलों में पढ़ाता है। आर्थिक रूप से संपन्न सरकारी सेवारत स्थाई शिक्षकों के बच्चे तो निश्चित तौर निजी स्कूलों में ही पढ़ते है।  दूसरी सरकारी …

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क्या आंखें खुल जाएगी ‘Be The Bitch’ के बाद ?

final-depression

हमारे इस समाज का भी कोई जवाब नहीं ये कब किस लड़की को क्या बना दें कुछ नहीं कहा जा सकता। कुछ नहीं कहा जा सकता इस बारे में कब ये किस लड़की को देवी बना दें और कब राक्षसी, क्योंकि इस समाज के कुछ अपने मापदंड हैं, जरुरी नहीं …

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क्या मौत कमाने में लगाया था वक्त मैंने?

suicide

प्यार, लिव-इन, धोखा, ब्रेक अप, मूव ऑन, शादी ये कुछ ऐसे शब्द है, जो आजकल के युवाओं की जुबां पर चढ़े हुए हैं। बात लव बर्ड्स की, जिनमें से कुछ को अपनी मंजिल मिल जाती हैं और कुछ बीच सफर में एक दूसरे का साथ छोड़ देते हैं। इस बीच …

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राजनैतिक गलियारों से उठकर, क्या प्रथाए बदल पाएंगे राजनेता…

politics

28-29 सितम्बर को हुए सर्जिकल स्ट्राइक के बाद से देश की सियासत गर्माती जा रही हैं। एक ओर पीएम नरेंद्र मोदी को इस ऑपरेशन के लिए बधाईयां मिल रही हैं तो दूसरी तरफ उनसे ऑपरेशन से जुड़े सबूत मांगे जा रहे हैं। देश की सुऱक्षा के मामले को इस तरह …

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नजरें झुकाकर नहीं, उठाकर जवाब दो…

crime-against-women

आज के इस समाज में लड़की होना अपने आप में बड़ी बात है। इतनी बड़ी कि हम शायद ही उस एहसास को शब्दों में बयां न कर पाए। जिससे लड़कियां रोजमर्रा की जिंदगी में दो चार होती, कहां उन्हें ऐसे सिरफिरे नहीं टकराते होंगे जो एक टक उन्हें घूरते रहे। …

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