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खुला खत

लाचार मम्मा की उम्मीद…

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गोधुली बेला में चला गया, खेल खेलने टोली सूरज चाचा चले गये तो, लगा डराने टोली, चंदा मामा निकल गये फिर, लगा झूमने टोली ढूंढते-ढूंढते मम्मा पहुंची, बोले प्यार की बोली, गले लगाके मम्मा, देखन चाहे मुखड़ा चोरी मम्मा की ममता प्यार से, बोले प्य़ारी बोली, समझ ना आया क्यों …

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नादान इश्क़…

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लरजते लम्हों से दिल की बातें, कह ना सका नैनों का इशारा था, इजहार कर ना सका, उसकी आंखों की चाहत, दिल सह ना सका चाहत को रूसवाईयों के, डर से कह ना सका, चली गई तन्हाईयों में, जुदाई सह ना सका लरजते लम्हों से दिल की बातें, कह ना …

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मां की ममता का कर्ज़…

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मां तू ममता की धनी, मैं कंगला रह गया बचपन में सुना लोरी सोचा सुनाऊं भजन चोरी पड़ी पैनी नज़र उसकी… कड़वा वचन बोल चला गया तेरा दूध पीकर भी, मैं चंडाल बन गया तरसे तू रोटी के खातिर खिलाने निकला तुझे रोटी पड़ी पैनी नज़र उसकी… कुतिया को डाल …

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फिर ये दीवार क्यों…

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भाई बंधु सब अपने, रिश्तों में प्यार चाहिये फिर ये दीवार क्यों मां की ममता, भाईचारा, प्यार का एहसास चाहिये फिर ये दीवार क्यों भाई को भाई का साथ, एक छत की छांव चाहिये फिर ये दीवार क्यों स्वर्ग से सुन्दर घर में, आंगन बड़ा विशाल चाहिये फिर ये दीवार …

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समय बदल गया…

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बचपन के वो दिन, आज भी पुकारते हैं, सोच वही है, समय बदल गया। अपनी यादों को समेटे हुए, प्यार से दुलारते हैं, प्यार वही है, समय बदल गया। धुंधली आंखों से बुढापे में, आज भी बुलातें हैं, नज़रिया वही है, समय बदल गया। बाहें फैलाये हुए, आज भी गले …

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अंधकार में संस्कार…

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डूब जाएगा अंधकार में संस्कार एक दिन, पहचान के लिये तड़पोगे जनाब एक दिन, बिन पहचान हो जाओगे नाकाम एक दिन, अंधकार में डूब जाएगा सम्मान एक दिन, जमीर भी तो मांगेगा हिसाब एक दिन, छुप-छुप के मांगोगे अधिकार एक दिन, डूब जाएगी अंधकार में आवाम एक दिन, पहचान के …

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दो टुक, प्यार में…

ways-to-love

  दो टुक कह सका प्यार में कहने को तो बहुत कुछ था, एहसास का समंदर दिल में बहने को तो बहुत कुछ था, दिल की बात छुपा चेहरों से दिखने को तो बहुत कुछ था, दिल की बातें दिल की जुबां से  दो टुक में तो बहुत कुछ था, …

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आईना खुद का…

own-mirror

ज़िंदगी के सफर में, आईना खुद का खुद के आईने में, जीवन खुद का खुशहाल जीवन का, आईना खुद का खुद के आईने में, सफर खुद का सोच के सफर में, प्रयास खुद का खुद के आईने में, मंजिल खुद का सफर में कदम, लड़खड़ाये खुद का खुद के आईने …

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कोशिश करें तो हार नहीं…

struugle

  कोशिश करें तो हार नहीं, इरादे पक्के हों तो, मेहनत बेकार नहीं उम्मीद करें तो, अंधकार नहीं वक्त लगेगा मिलेगी मंजिल, अंधकार नहीं सोच की उपज कंगाल नहीं, सोच उगलेगी, एक दिन सोना, इंकार नहीं वक्त का तकाज़ा है, हार नहीं जीत तो हमारी है, उसकी दरकार नहीं मझधार …

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सपनों की मंजिल…

manjil

मंजिल अंजान गलियों में घूमता गया करीब होकर भी दूर मंजिल था ठोकर खाकर भी चलता गया दिल के करीब वो मंजिल था हर जुल्म को भी सहता गया दिल से संजोया वो मंजिल था करीब होकर भी भटकता गया अंजान गलियों में वो मंजिल था लोगों के तंज को …

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