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खुला खत

इंतज़ार…

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सुबह भेजने की जल्दी शाम को इंतज़ार करती है, घर आने की खुशी देरी का तकरार करती है, दिल में खुशी चेहरे पे गुस्सा आंखों से इकरार करती है, इश्क में इंसानियत की दिल से दीदार करती है, प्यार को लब्ज़ों से नहीं आंखों से बयां करती है, हुई देरी …

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वो पराई हो गई…

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सपनों की वो गुड़िया जो संग में खेला करती थी वो पराई हो गई, कल तक थी वो लाड़ली बात बात में झमेला करती थी वो पराई हो गई, एक पेड़ की थी वो टहनी हर पल को संजोया करती थी वो पराई हो गई, परंपराओं की थी वो विडंबना …

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बेसहारा हो गया…

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बेसहारा हरे भरे बाग का बागवां बेसहारा हो गया, उम्मीदों में लगा पेड़ अब बड़ा हो गया, छांव के लिये तरसता बागवां बेसहारा हो गया, खून पसीने से सींचा पेड़ अब वो खड़ा हो गया, फल खाने के समय बागवां बेसहारा हो गया, चार दीवारियों से घिरा पेड़ अब हरा …

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जागों लाइनों में खड़े हो जाओ

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कवि की कविता जो लोगों को एहसास कराती हैं जिन्दगी से जुड़े फलसफों के बारे में… बचो देश के गद्दारों से, “भारत माता” का नारा लगाएगा नासमझी थी, समझाकर, देशवासियों को लूट जाएगा जागों लाइनों में खड़े हो जाओ, देश का काला धन खत्म हो जाएगा। तुम्हारे कंधों पे बंदूक …

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संदेश कविता की पहल में…

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कवि की कविता जैसे किसी का पहला प्यार, दिल से जुड़े जज्ब़ात या फिर वो बात जो दिल की तह में बस गई हो। कविता वो एहसास हैं, जो मन में चल रही विडम्बनाओं को शब्दों के जरिए परोसा जाता हैं। किसी कवि की पहली कविता वे शुरूआती अक्षर होते …

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अंधकार से प्रकाश की ओर……

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अंधकार जब नभ में बढ़ता जाएं डरावनी आवाज जब तुम्हें सताए आओँ! ऐसे पल में अपने मन में एक दीया ही जलाए । दीया जो तर्कपूर्ण ज्ञान का हो, वस्तुपरक विज्ञानं का हो जो मिथ से पर्दा उठाकर आदम्बरवादियोँ को दूर भगाकर अँधविश्वासोँ को जलाए। अंधकार जब नभ में बढ़ता …

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