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केन्द्र का बड़ा फैसलाः आखिरी आदमी का होगा इलाज, देना होगा हेल्थ सेस

नयी दिल्ली। केन्द्र सरकार देशवासियों के स्वास्थ्य को लेकर कितनी जागरूक है इसका जीता जागता नमूना नेशनल हेल्थ पॉलिसी से लग रहा है। स्वास्थ्य मंत्रालय देश के नागरिकों की सेहत ठीक और बीमार होने पर उसका इलाज हो सके इसके लिये सरकार एक ऐसी खास योजना लागू करने जा रही है जिससे देश की 80 प्रतिशत आबादी को इस पॉलिसी का लाभ मिल सकेगा। लेकिन इसके एवज में जनता को हेल्थ सेस देना पड़ सकता है।

इस पॉलिसी में सरकार प्राइवेट पार्टनरश्पि प्रोग्राम के प्राइवेट अस्पताओं से एक करार करेगी। लेकिन शिक्षा के अधिकार की तरह यह मौलिक अधिकार नहीं होगा इस बात का संकेत भी सरकार ने दे दिया है। सूत्रों की मानें तो मोदी सरकार इस बिल को पिछले दो साल से पास कराने की फिराक में थी। कैबिनेट ने इस हेल्थ पॉलिसी को मंजूरी दे दी है। दिलचस्प बात यह है कि इस पॉलिसी के तहत इलाज कराने वाले का बीमा भी किया जायेगा।
जानकारी के अनुसार अब तक पीएचसी पर गर्भवती महिलाओं की प्रसूति पूर्व जांच व बच्चों के लिये जीवनरक्षक टीके आदि की सुविधा उपलब्ध कराये जाते है। नयी पॉलिसी के तहत इनका उन्नयन किया जाने की योजना है। बदलाव के तहत गैर संक्रमण रोगों की जांच और अन्यह अहम् बिंदू भी शामिल किये जायेंगे। जिला स्तरीय अस्पतालों का उन्नयन किया जायेगा। सरकार का लक्ष्य है कि 80 प्रतिशत आबादी का इलाज पूरी तरह निःशुल्क सरकारी अस्पताओं में हो जिसमें दवा, जांच और इलाज भी शामिल होंगे।

विनय गोयल की रिपोर्ट

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