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भारत का अंधा कानून, इंसान से कीमती “गाय का खून”

नई दिल्ली: भारत में अब खुद न्यायाधीश कानूनी व्यवस्था से परेशान नज़र आ रहे हैं। जी हां 15 जुलाई को न्यायाधीश संजीव कुमार ने 2008 हिट एंड रन केस में सुनवाई के दौरान आरोपी को 2 साल की सज़ा सुनाई लेकिन इसके साथ-साथ न्यायाधीश ने इस बात पर अफसोस जताया कि गाय को मारकर भागने वालों को अलग-अलग राज्यों के अनुसार जहां 5, 7 या फिर 14 साल की सज़ा होती है लेकिन वहीं कानून में सेक्शन 304 ए इन्डीयन पीनल को़ड के तहत किसी व्यक्ति को मार कर भगने की सज़ा सिर्फ 2 साल की है।

जी हां ऐसे कानून को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए जज संजीव कुमार ने प्रधानमंत्री को इस मसले पर खत लिखने की बात कही। अगर न्यायाधीश की इस बात पर गौर किया जाए ये वाकई चिंता का विषय है। भरतीय कानून के अनुसार गाय की जान को इन्सानों से जयादा तवज्जो दी जाती है।

शायद यही वजह है की भारत देश में हर 4 मिनट में एक आदमी की जान ऐक्सीडेंट  की वजह से जाती है। खुद जज संजीव कुमार ने इन आकड़ों पर रोशनी डालते हुए बताया है कि हमारे देश में हर साल लगभग 4 लाख 70 हजार से ज्यादा रोड ऐक्सीडेंन्ट होते हैं।

न्यायाधीश संजीव कुमार की इस चिंता के बाद अब देखना ये है कि क्या पीएम इसपर कुछ करते हैं या फिर नहीं…?

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