Home / खुला खत / सपनों का सौदागर सुब्रत राॅय सहारा
subrat

सपनों का सौदागर सुब्रत राॅय सहारा

पिछले तीन साल से सहारा समूह पर सेबी की वक्र दृष्टि है। दो साल तक जेल में रहने के बाद आजकल सुब्रत राॅय बेल पर चल रहे हैं। सेबी ने सहारा की वित्तीय योजनाओं पर धन जमा कराने पर रोक लगा रखी है। साथ पुराने खाताधारकों का बकाया धन वापस करने का निर्देश दे रखा है। सेबी ने जो समयावधि सहारा को दी है वह बीत चुकी है। सेबी सहारा को लेकर सुप्रीमकोर्ट में गयी है। सुप्रीमकोर्ट ने सेबी का साथ देते हुए सहारा को निर्देशों का पालन करने का आदेश दिया। पिछले तीन सालों में सहारा समूह की जो छवि धूमिल हुई है उसे संवारने के लिये राॅय देश के अनेक हिस्सों में अपने कार्यर्ताओं से संवाद कर रहे हैं। वो ऐसा इसलिये कर रहे हैं कि संस्था के पुराने कार्यकर्ताओं का मनोबल न टूटे। अपनी सभाओं में सुब्रत राॅय कार्यकर्ताओं को यह एहसास दिलाने का अथक प्रयास कर रहे हैं कि वो कार्यकर्ताओं की खुशियों को बनाये रखने के लिये हमेशा सक्रिय रहे हैं चाहे वो जेल में रहे हों या सामान्य जीवन में। संस्थान के सूत्र बता रहे हैं सुब्रत राॅय कंपनी की साख को बचाने और सुदृढ़ करने के लिये पूरे जोश से जुटे हुए हैं। लेकिन सेबी उनके मंसूबों को कितना पूरा होने देती है यह आने वाला वक्त ही बतायेगा। फिलहाल तो कर्मचारी अपनी सैलरी नियमित रूप से मिल जाये इसी में अपनी भलाई समझ रहे है।

लगभग चार दशक पहले सहारा का प्रादुर्भाव हुआ था। ऐसा माना जाता है कि सुब्रत राॅय ने 1978 में सहारा इंवेस्टमेंट इंडिया में जाॅब करना शुरू किया था। उस समय वो गोरखपुर में रहते हुए फाइनेंस कंपनी का काम करते थे। धीरे-धीरे उन्होंने अपने विश्वसनीय साथियों की मदद से कंपनी पर कब्जा जमा लिया और कंपनी का नाम सहारा इंडिया हो गया। गोरखपुर से मुख्यालय यूपी की राजधानी लखनऊ में बनाया गया। अस्सी के दशक तक सहारा इंडिया नान बैंकिंग सेक्टर की शीर्ष वित्तीय संस्थाओं में गिना जाने लगी। इस बीच सुब्रत राॅय कई बार अखबारों की सुर्खियों में छाये। सहारा पर यह आरोप लगे कि पूर्व मुख्यमंत्री बीर बहादुर सिंह ने भी काफी बड़ी रकम जमा की थी उनकी मौत के बाद कपनी ने उनका भी पैसा देने में काफी आना कानी की थी।

19987-88 में बैडमिंटन प्लेयर सैयद मोदी हत्याकांड में सुब्रत का नाम जोड़ा गया। इस हत्याकांड की गूंज न केवल यूपी में सुनाई बल्कि पूरे देश में सुनाई दी। कुछ लोगों का मानना था कि मोदी का बहुत सा रुपया सहारा में जमा था। मोदी अपना पैसा वापस मांग रहे थे और कंपनी रुपया वापस करने के मूड में नहीं थी। इसी को लेकर मोदी और सहारा के बीच विवाद हुआ और इस हत्याकांड की साजिश रची गयी। किसी तरह सियासी हथकंडों का इस्तेमाल कर अपने को बचाने में सफल हुए। यूपी के समाचार पत्रों में सुब्रत राॅय की मौज मस्ती के फोटो प्रकाशित किया गया। इन फोटो में राय अधनंगी जवान लड़कियों के साथ रंगीन मिजाज में दिख रहे थे।

सहार प्रबंधन ने प्रदेश के प्रमुख समाचार पत्रों बड़ा बड़ा विज्ञापन दे कर मामला ठंडा किया। उस समय प्रदेश में समाजवादी सरकार थी। मुलायम सिंह से सुब्रत राॅय की मुलाकात विवादित नेता अमर सिंह ने करायी थी। सरकार की मदद से सहारा ने सफलता की ऊंचाइयों को छुआ। सहारा का बिजनेस यूपी, बिहार, प. बंगाल, मध्यप्रदेश और अन्य प्रदेशों में फैल चुका था। राजनीतिक शह पर सहारा ने काफी ऊंची उड़ान भरी फाइनेंस के साथ उन्होंने रीयल्टी, हवाई सेवा, कन्ज्यूमर प्रोडक्ट्स आदि क्षेत्रों में कदम रखा। अब सहारा एक ब्रांड बन चुकी थी। देश में अपनी साख और प्रसिद्धि को बढ़ाने के लिये सहारा ने स्पोर्ट्स का सहारा लिया। हाॅकी और क्रिकेट जैसे खेलों की स्पोंसरशिप लेकर अपनी छवि को और निखारा। विदेशों में भी सहारा की साख बनने लगी। सहारा ने विदेशों में भी होटल व प्राॅपर्टी बनानी शुरू कर दी। इससे सहारा के फाइनेंस बिजनेस को काफी मदद मिली। सहारा का विस्तार हुआ तो कर्मचारियों के हौसले और उम्मीद बढ़ीं। एक समय था जब सहारा कर्मी अपने का सहारा से जुड़े होने में शर्म आती थी। लेकिन संस्था जब बुलंदियों पर पहुंची तो लोगों के बीच शान से कहते कि वो सहारा में हैं। 1990 से 2012 तक सहारा का स्वर्णकाल माना जा सकता है। सहारा का नाम न केवल भारत में बल्कि विदेशों में भी होने लगा। कर्मचारियों सैलरी और सुविधाओं में काफी सुधार आया।
इसके साथ सहारा सहारा ने देश के अनेक हिस्सों में टाउनशिप के जमीनों की खरीदफरोख्त करना शुरू कर दिया। इसके टाउनशिप के नाम पर भी काफी धन जुटाया। उनके इस प्रोजेक्ट में अनेक राजनीतिक दलों के दिग्गज नेताओं ने भी धन लगाया। अब तक सहारा का नाम देश के बड़े उद्योगपतियों के गिना जाने लगा। लेकिन कहते हैं न कि जब बुरा वक्त आता है यार दोस्त और पिछलग्गू सबसे पहले साथ छोड़ते हैं। एक समय था जब सुब्रत राॅय की पहंच मुलायम सिंह, राजबब्बर और अनेक गणमान्य लोगों तक थी।

चूंकि प्रदेश में काफी समय से बीजेपी व कांग्रेस की सरकारें नहीं रही। प्रदेश में समाजवादी ओर बहुजन समाज पार्टी की सरकारे लगभग तीन दशकों से कब्जा जमाये रखी थी। वर्तमान में यूपी में बीजेपी की सरकार है। सहारा पर बसपा और मुलायम सिंह का लेबिल लगा होने की वजह से बीजेपी सरकार और उनके नेता सहारा को कोई महत्व नहीं दे रहे हैं।

विनय गोयल के विचार

Next9news

Check Also

diwali

सुप्रीम कोर्ट के आदेश को जनता का तमाचा

विनय गोयल के विचार नयी दिल्ली। आजतक हम लोगों को यह भ्रम था कि उच्चतम …