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DU की घोषणा, SC/ST छात्रों को ‘0’ अंक लाने पर भी मिलेगा PHD में दाखिला, अन्य छात्र लाएं 94 अंक

नई दिल्ली: भारत की बदहाल शिक्षा व्यवस्था और जातीगत आरक्षण के बारें में पूरी दुनिया को पता है लेकिन क्या आप सोच सकते है कि जातीगत आरक्षण के वजह से किसी व्यक्ति को जिसको किसी विषय में शून्य नंबर आए हो उसको भी कॉलेज यूनिवर्सिटी में दाखिला मिल जाए तो ये कितना अचंभे वाली बात लगती है। लेकिन हमारे देश की सच्चाई तो यही है कि जो दिन रात पढ़ता है उसके हाथ कुछ नहीं आता और जो पूरे साल भर पढ़ाई के बदले कुछ भी कर ले वो पढ़ता तो बिलकुल नहीं है और किसी कॉलेज या यूनिवर्सिटी में दाखिले के समय अगर उसे कम नंबर भी आए हो तो दाखिला मिला जाता है, और जो दिन रात पढ़ता है अगर उसका रिजल्ट परसेंटेज कम आ जाए तो किसी भी अच्छे संस्थान में एडमिशन तक नहीं मिलाता। यह वयवस्था कितना सही है कितना गलत सब जानते हैं लेकिन बोलते सिर्फ वही है जिसको इनकी वजह से किसी अच्छे कॉलेज में दाखिला नहीं मिल पाता है। लेकिन सवाल सिर्फ कॉलेज में दाखिले या पढ़ाई के पैसे में छूट को लेकर नही हैं ये जातीगत आरक्षण सरकारी जॉब्स में भी है जो कोई भी राजनीतिक दल कभी भी नहीं हटाने वाला। लेकिन क्या आप सोच सकते है यही जातीगत आरक्षण अगर पीचईडी के दाखिले में समय हो और हलात यह जो जाए की अगर कोई प्रवेश परीक्षा में फेल हो जाए या उसे जीरो नंबर आए हो उसके बाद भी उसे दाखिला इस वजह से मिल जाए क्योंकि वह एक निचली जाती से आता है और हमारी सरकारों की वजह से उस व्यक्ति को उच्च शिक्षा में भी आरक्षण प्राप्त है।

जी हां मामला दिल्ली यूनिवर्सिटी के पीचईडी के छात्रो के दाखिले का है जहां पर इस सत्र में मैथ मे एडमिशन लेने के लिए SC, St के छात्रों को दाखिले के लिए प्रवेश परिक्षा में पास होने की भी जरुरता नहीं है। जी हां यहा पर पीचईडी में दाखिले  के लिए कटऑफ जिरो फिसद तय किया गया है वहीं सामान्य जाती वर्ग वाले छात्रों के लिए 200 मे से 94 नंबर तो OBC के छात्रों के लिए 84 नंबर कटऑफ निर्धारित किया गया है।

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यूनिवर्सिटी प्रशासन ने कुल 223 छात्रों को साक्षात्कार के लिए 31 से 4 अगस्त (2017) की तिथि निर्धारित की थी जिसके बाद एडमिशन के लिए कटऑफ लिस्ट जारी किया गया। जिसमें समानय छात्रों के दाखिले के लिए 94 अंक निर्धारित किया गया। वही OBC वर्ग के छात्रों के लिए 84 अंक और SC,ST वर्ग के छात्रों के लिए जिरो अंक निर्धारित किया गया। दरअसल इसके पिछे यूनिवर्सिटी प्रसासन का दिलिल यह है कि अधिकांश SC,ST वर्ग के छात्रों का नंबर 6 आया है इसमें प्रसासन यह दुविधा में था कि कितना कटऑफ निर्धारित किया जाए। जिसके बाद यह तय किया गया कि जिरो कटऑफ निर्धारित किया जाए।

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यूनिवर्सिटी के इस कदम के बाद समान्य वर्ग के छात्रों में गुस्सा है तो वहीं ट्विटर पर भी इसको लेकर खूब आलोचना किया जा रहा है। लेकिन यूनिवर्सिटी प्रसासन का यह कदम दिखाता है कि हमारे समाज में पढ़ाई पर किस कदर आरक्षण हावी है। ये हामारे सामज की सोच की दिखाती है कि कैसे एक छात्र जो प्रवेश परीक्षा में फेल हो गया है उसके बावजूद भी उसे दाखिला मिल जाता है लेकिन जो बच्चा दिन रात पढ़ाई करता है वो दाखिले से वंचित रह जाता है।

लव कुमार की रिपोर्ट 

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