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क्या पड़ोसी मुल्कों से खराब संबंध हैं असम और बिहार में बाढ़ के पीछे की वजह…?

नई दिल्ली: बाढ़ के चलते बिहार, उत्तर प्रदेश बंगाल और असम सबसे अधिक प्रभावित हैं। अब तक मिली जानकारी के मुताबिक बाढ़ की वजह से उत्तर प्रदेश में 69, बिहार में 202, बंगाल में 52 और असम में 147 लोगों की मौत हो चुकी है और बाढ़ का कहर अब भी जारी है। बिहार और असम में बाढ़ आना कोई नई बात नहीं है लेकिन इस बार की बाढ़ ने पिछले कई दशकों के रिकॉर्ड को तोड़ दिये है। एक तरफ जहां असम के 20 जिले पानी के आगोश में समाए हुए हैं तो वहीं दूसरी तरफ बिहार के 16 जिले बाढ़ से प्रभावित हैं।

असम में बाढ़ का मंजर इस कदर है कि वहां के लोगों का कहना है कि ऐसी बाढ़ किसी ने भी 29 साल पहले भी नहीं देखी थी। आलम यह है कि बाढ़ की वजह से असम के 20 जिलों के करीब 2 हजार से भी ज्यादा गांव प्रभावित हैं। मरने वालों का आंकड़ा लगभग 150 को भी पार कर गया है। जन-जीवन पूरी तरह से अस्त व्यस्त है। हालत यह है कि 23 लाख लोग अपने ही घर से बेघर हो चुके हैं ना कुछ खाने के लिए है ना रहने के लिए छत, जो कुछ था वो बाढ़ अपने साथ बहा ले गई। अब तो आसार यही है कि आसमान से हेलिकॉप्टर से कुछ खाने को मिल जाए तो जिदंगी बच जाए।

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लेकिन इन सब के बीच सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि क्या सरकार के पास बाढ़ आने की जानकारी होती तो इस भयानक बर्बादी से बचा जा सकता था। जी हां असम में जो बाढ़ आई है वो ब्रह्मपुत्र नदी के कारण आई है जो कि तिब्बत से निकलती है जिस पर चीन का कब्जा है। तो सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या चीन ने जानबूझ कर असम में बाढ़ आने दी हम ऐसा इसलिए कह रहे हैं कि भारत और चीन में 2006 में एक संधि हुई थी जिसके तहत चीन को 15 मई से लेकर 15 अक्टूबर तक नदी के जल स्तर की जानकारियां साझा करनी होती थी लेकिन चीन ने इस साल ब्रह्मपुत्र और सतलुज के जल स्तर के बारे में कोई जानकारी साझा नहीं की। इस बात की जानकारी शुक्रवार को विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने दी। रवीश कुमार ने बताया कि 2006 के इस समझौते के तहत एक एक्सपर्ट ग्रुप बनाया गया था जिसकी आखिरी बैठक अप्रैल 2016 में हुई थी जिसके बाद से दोनों देशों के बीच किसी भी प्रकार की कोई जानकारी साझा नहीं की गई है।

तो क्या यह संभव है कि चीन जानबूझ कर भारत को परेशान करने और सामरिक क्षति पहुंचाने के लिए ब्रह्मपुत्र के जल स्तर के बारें में जानकारी साझा नहीं कर रहा जिससे असम को भारी तबाही का सामना करना पड़े। वहीं बिहार में भी आई बाढ़ के पीछे नेपाल में हो रही भारी बारिश ही वजह रही है। बिहार में मरने वालो की संख्या अब तक 202 पहुंच चुकी है वहीं एक स्थानीय अखबार ने कहा कि मरने वालों की संख्या लगभग 300 को पार कर गई है। पिछले कई दिनों तक नेपाल में भारी बारिश हुई जिसके बाद नेपाल ने भारी मात्रा में नदियों में अचानक पानी छोड़ दिया जिसके वजह से बिहार में नदियों का जलस्तर बढ़ गया और पानी ने भयानक बाढ़ का शक्ल धारण कर ली और तबाही मचाना शुरु कर दिया। और यही हाल नेपाल के भी साथ रहा और नेपाल से भी किसी भी प्रकार की नदियों में बढ़ते जलस्तर को लेकर कोई सूचना नहीं मिली थी। कुछ सूत्रों का तो यह भी मानना है कि नेपाल पर आज कल चीन का प्रभाव अधिक है जिसकी वजह से नेपाल ने भी आगे आकर नदियों में बढ़ते जलस्तर के बारे में भारत सरकार को कोई सूचना नहीं दी जिसकी वजह से अचानक बाढ़ आई और सबकुछ बहा कर ले गई।

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वहीं चीन के साथ बिगड़ते रिश्ते को लेकर कुछ लोगों का मानना है कि पिछले दो महीनों से डोकलाम में जो स्थिति बनी हुई है उसकी वजह से चीन भारत को परेशान करने के लिए यह सब कर रहा है। चीन जानता है कि वो जितना नुकसान भारत को सीमा पर नहीं पहुंचा सकता उससे कहीं ज्यादा वो पानी से भारत को नुकसान पहुंचा सकता है। लेकिन अगर इस बात में थोड़ी सी भी सच्चाई है कि चीन ने जानबूझ कर भारत में बाढ़ के रूप में तबाही लाने का प्रयास किया है तो चीन की ओछी मानसिकता को दर्शाता है। लेकिन भारत सरकार को भी चाहिए कि जिस प्रकार वो अपनी सीमा की सुरक्षा करता है उसी प्रकार नदियों के जलस्तर का भी ध्य़ान रखे और उससे होने वाली घटनाओं के बारे में सचेत रहे न कि अपने पड़ोसी देशों पर निर्भर रहे।

लव कुमार की रिपोर्ट 

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