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अंधकार से प्रकाश की ओर……

अंधकार जब नभ में बढ़ता जाएं
डरावनी आवाज जब तुम्हें सताए
आओँ! ऐसे पल में अपने मन में
एक दीया ही जलाए ।
दीया जो तर्कपूर्ण ज्ञान का हो,
वस्तुपरक विज्ञानं का हो
जो मिथ से पर्दा उठाकर
आदम्बरवादियोँ को दूर भगाकर
अँधविश्वासोँ को जलाए।
अंधकार जब नभ में बढ़ता जाएं
डरावनी आवाज जब तुम्हें सताए
आओँ! ऐसे पल में अपने मन में
एक दीया ही जलाए।
ज्ञान से विज्ञानं की तरफ
अंधकार से प्रकाश की तरफ
जो आत्म चिंतन जगाये।
जिससे अन्तः प्रकाशमय हो,
मन जिससे उल्लासमय हो
आओ! हम सब मिलकर एक ऐसा दिया ही जलाये
जब सवाल मन में उठेगे, द्वंद्ध से माथे हिलेगे
जाँच बिना ना ज्ञान, ज्ञान होगा ।
उदय उस पल विज्ञानं होगा।
आओ हम विज्ञानं जगाये।
एक दिया ही जगाये।
एक दिया ही जलाये।

लेखक अश्विनी कुमार

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