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पुरानी दिल्ली की एक हवेली…

पुरानी दिल्ली में ना जाने कितनी ही ऐसी चीजें हैं जो आपको एक अलग ही समय की याद दिलाती है, यहां कि हर गली हर आशियाना अपने आप में एक अलग ही कहानी बयां करता है। यूं तो देश की राजधानी दिल्ली राष्ट्रीय धरोहरों से भरी पड़ी है, लेकिन पुरानी दिल्ली इस मामले में बेहद खास मानी जाती है। दिल्ली में समय के साथ-साथ कई परिवर्तन आए हैं, लेकिन पुरानी दिल्ली की जहां तक बात कि जाए यहां आज भी कई सारी ऐसी चीजें आपको देखने को मिल जाएंगी, जो आपको सोचने पर मजबूर करेंगी की आधुनिक दौर में भी यहां कितनी सारी प्राचीन धरोहरें मौजूद हैं।

पुरानी दिल्ली एक खास बात ये है कि पुरानी दिल्ली को हवेलियों का गढ़ कहा जाता है, रिपोर्ट्स की मानें तो यहां बीस वर्ष पहले तक करीब सात सौ हवेलियां थी। सुनने में आया है कि जब भारत पर मुगलों का शासन था, तो ऐसे में उनके दरबारियों की ओर से ऐसी बहुतेरी हवेलियों का निर्माण करवाया गया जो आज पुरानी दिल्ली में आकर्षण के केंद्र बन चुकी है, लेकिन बदलते वक्त के साथ हालात थोड़े बदले और अब इन हवेलियों की संख्या 100 हो गई है। इन्हीं में से एक हवेली के बारे में आज हम आपको बताने जा रहे हैं, इस हवेली का नाम धरमपुरा है।

ये हवेली शाहजहानाबाद के धरमपुरा इलाके में है, जिसका निर्माण 1869 में किया गया था। इसके नाम के पीछे का राज है कि इस इलाके में बहुत सारे धार्मिक संस्थान हैं। दिलचस्प बात ये भी है कि इस हवेली के ठीक पीछे दुनिया की सबसे छोटी गली भी है जिसका नाम गली कृष्णा है। इस हवेली की खासियत ये है कि इसका निर्माण बलुआ पत्थर और संगमरमर से किया गया है, यही खासियत इसे बाकी हवेलियों से थोड़ा अलग बनाती है। तो जब भी अब आप पुरानी दिल्ली से होकर गुजरें तो जरा एक बार इस हवेली पर नजरें जरुर दौड़ाएं यकीन मानिए इसकी सुंदरता आपका दिल छू लेगी।

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