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कितना सफल होगा एनडीए का मिशन 350, विपक्ष कितना दमदार

नयी दिल्ली। मोदी सरकार देश में सत्ता को दोबारा हासिल करने की फिराक में जुट गयी है। वहीं पूरा विपक्ष एकजुट होने की कवायद करने की कोशिश में है। लेकिन विपक्ष की एकजुटता लालू की बीजेपी भगाओ देश बचाओ रैली में आंशिक रूप से सफल दिखी लेकिन रैली में भीड़ की कमी से लालू को झटका जरूर लगी होगी। बीजेपी शासन के तीन साल पूरे हो चुके हैं लेकिन एनडीए और सरकार को 2019 की चिंता अभी से सतानी शुरू हो गयी है। पार्टी अध्यक्ष अमित शाह ने इसके लिये अभी से कमर कस ली है। वो पूरे देश में घूम घूम कर कार्यकताओं को मिशन 350 के लिये प्रेरित कर रहे हैं। खास तौर से उन प्रांतों में जहां बीजेपी अब तक कुछ खास करने में विफल रही है। यूपी उत्तराखंड में भाजपा की सरकार बनने के बाद भी उन्होंने अपनी सांगठनिक शक्ति को बढ़ाये रखने की गति को बरकरार रखा है।

दक्षिण भारतीय प्रांतों में उनकी कोशिश का असर है कि आज एआईएडीएमके उनके साथ आने को तैयार हो गयी है। एआईएडीएमके के साथ आने से एनडीए सरकार शिवसेना को एक सबक देने की तैयार कर रही है। या यह कहें कि शिवसेना का विकल्प एनडीए को मिल गया है। एआईएडीएमके संख्या बल में भी शिवसेना से अधिक है। अतः राज्यसभा और संसद में भी सरकार ज्यादा शक्तिशाली होने जा रही है। उन्हीं के प्रयासों का फल है कि आज बिहार में जेडीयू और बीजेपी की एक फिर सरकार बन गयी है। इसे अमित शाह की बड़ी उपलब्धि माना जा सकता है। भाजपा की विजययात्रा का रथ बिहार में रुका था। जदयू और एआईएडीएमके ने भी एनडीए सरकार में शामिल होने की इच्छा जतायी है। इन दलों के सरकार में प्रतिनिघित्व देने के लिये सरकार ने लगभग दो दर्ज मंत्रियों के विभागों में फेरबदल करने का मन बना लिया है। इनमें से कुछ को पदमुक्त किया जायेगा तो कुछ को प्रमोट भी किया जायेगा। कुछ मंत्रालयों का विलय भी किया जा सकता है।

इसी कड़ी में आधा दर्जन मंत्रियों से इस्तीफे भी लिये जा चुके हैं। कुछ केन्द्रीय मंत्रियों धर्मेंद्र प्रधान और जेपी नड्डा को प्रदेश में भेजा जा सकता है। धर्मेंद्र प्रधान ओडिशा से आते हैं वहां भी कुछ समय बाद चुनाव होने हैं प्रधान वहां के लोकप्रिय नेताओं में गिने जाते हैं। इसी कड़ी में जेपी नड्डा को भी हिमाचल भेजा जा सकते हैं। वहां भी जल्द ही चुनाव होने हैं। इस फेरबदल में आरएसएस से भी कुछ लोगों को मंत्रिमंडल में शामिल किया जा सकता है। इनमे विनय सहस्त्रबुद्धे और भूपेंद्र यादव का नाम रेस में सबसे आगे है।

दो सितंबर को मोदी सरकार का तीसरा और आखिरी फेरबदल होने जा रहा है। इसे इस सरकार का अंतिम फेरबदल माना जा सकता है। इस फेरबदल 2019 के मिशन 350 के तहत किया जा रहा है। दक्षिणभाषी प्रदेशों मे अभी तक बीजेपी की अच्छी पकड़ नहीं थी लेकिन तमिलनाडु में सत्ताधारी दल के समर्थन से एनडीए को 2019 में मिशन 350 का प्राप्त करना आसान हो जायेगा। जहां भाजपा और उनके समर्थक दलों की सरकारें है वहां यह प्रयास किया जा रहा है कि वहां पहले से सीटें कम न हों। इसमें यूपी, उत्तराखंड, हरयिाणा, महाराष्ट्र, गुजरात, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, असम, राजस्थान, मणिपुर, गोवा, जम्मू कश्मीर, राजस्थान बिहार, झारखंड, आंध्र प्रदेश सिक्किम व अरुणाचल में भाजपा और उनके समर्थक दलों की सरकारें हैं।

साल भीतर गुजरात, राजस्थान, मध्यप्रदेश, गुजरात, छत्तीसगढ़, मेघालय, हिमाचल व कर्नाटक में आम चुनाव होने वाले हैं। हिमाचल और कर्नाटक में कांग्रेस की सरकारें हैं। कर्नाटक में बीजपी सत्ता पाने के लिये जी तोड़ प्रयास कर रही है। इसके लिये अमित शाह स्थानीय नेताओं के साथ लगातार संपर्क बनाये हुए हैं। दलितों को अपने पक्ष में लाने के लिये भाजपा अध्यक्ष समेत वरिष्ठ नेता उनके घरों में जाकर भोजन करने के कार्यक्रम चला रहे हैं। लेकिन वहां बीजेपी की ये योजनाएं सत्ता पाने में कितना सफल करा पायेंगी यह समय बतायेगा। कर्नाटक में सीएम सिद्धारमैया काफी मजबूत स्थिति में दिख रहे हैं। वहीं गुजरात, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में लगभग डेढ़ दशक से सत्ता में है। इन प्रदेशों में काफी असंतोष देखने को मिल रहा है। किसान आंदोलन, नोटबंदी, जीएसटी, बाढ़ व स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर वर्तमान सरकारों को हार का मुंह देखना पड़ सकता है। वैसे अपनी सरकारों को बचाने के लिये पार्टी अध्यक्ष हर संभव प्रयास करते दिख रहे हैं।

विनय गोयल की रिपोर्ट

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