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लापरवाही के चलते आइसीआईसीआई बैंक को 16 हजार करोड़ की चपत

नयी दिल्ली। आईसीआईसीआई बैंक की एम डी व सीईओ चंदा कोचर ने वीडियोकान की एक कंपनी को अनियमित तरीके से 3250 करोड़ का लोन दिया। इस लोन का केवल कुछ हिस्सा ही बैंक को वापस किया गया। 2017 में इस कंपनी को एनपीए करार कर दिया गया। वीडियोकाॅन कंपनी ने 2810 करोड़ रुपया वापस नहीं किया। बैंक की गल्ती से तीन दिनों के भीतर 16 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा डूब गये है। मामले की गंभीरता को देखते हुए सेबी और सीबीआई ने इस मामले की जांच शुरू कर दी है।

चंदा कोचर का नाम देश में अनजाना नहीं है। चंदा कोचर देश के सबसे बड़े बैंक आईसीआईसीआई की एमडी व सीईओ हैं। उन पर आरोप है कि उन्होंने अपने पति दीपक कोचर को वीडियो कोन की मदद से फायदा पहुचाने का गंभीर आरोप लगाया गया है। उन पर यह भी आरोप है कि उन्होंने वीडियोकाॅन ग्रुप को नियमों को ताक पर रख कर 3250 करोड़ रुपये का लोन दिया गया। बाद में यह लोन एनपीए घोषित कर दिया गया। उन पर यह आरोप बैंक व वीडियोकाॅन कंपनी के शेयर होल्डर अरविंद गुप्ता ने लगाया है। अरविंद गुप्ता ने 2016 में इस घपले की जानकारी पीएमओ, सेबी आरबीआई समेत अन्य विभागों को लिखित सूचना दी लेकिन उन्हें किसी विभाग से कोई जवाब नहीं दिया गया।

सीबीआई ने अपनी आरंभि‍क जांच के तहत कुछ आईसीआईसीआई बैंक अधि‍कारि‍यों से पूछताछ की है। सीबीआई इस बात का पता लगा रही है कि‍ साल 2012 में वीडि‍योकॉन ग्रुप को दि‍ए गए 3,250 करोड़ रुपए के लोन में बैंक कि‍सी तरह की गड़बड़ी में शामि‍ल है या नहीं।
आईसीआईसीआई बैंक पर मार्केट रेग्युलेटर सेबी की भी नजर है। सेबी ने किसी भी संभावित डिसक्लोजर और कॉरपोरेट गवर्नैंस से संबंधित खामियों के मामले में जांच शुरू कर दी है। इसके साथ ही आईसीआईसीआई बैंक और कुछ सरकारी बैंकों सहित लेंडर्स ग्रुप से लोन लेने में ‘लेनदेन’ के आरोपों के कारण वीडियोकॉन और इंडस्ट्रीज और उसके प्रमोटर भी सेबी के रडार पर आ गए हैं।

विनय गोयल की रिपोर्ट

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