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आईसीआईसीआई बैंक का 3250 करोड़ डूबने की हकीकत, सीईओ चंदा कोचर शक के दायरे में

नयी दिल्ली। चंदा कोचर का नाम देश में अनजाना नहीं है। चंदा कोचर देश के सबसे बड़े बैंक आईसीआईसीआई की एमडी व सीईओ हैं। उन पर आरोप है कि उन्होंने अपने पति दीपक कोचर को वीडियो कोन की मदद से फायदा पहुचाने का गंभीर आरोप लगाया गया है। उन पर यह भी आरोप है कि उन्होंने वीडियोकाॅन ग्रुप को नियमों को ताक पर रख कर 3250 करोड़ रुपये का लोन दिया गया। बाद में यह लोन एनपीए घोषित कर दिया गया। उन पर यह आरोप बैंक व वीडियोकाॅन कंपनी के शेयर होल्डर अरविंद गुप्ता ने लगाया है। अरविंद गुप्ता ने 2016 में इस घपले की जानकारी पीएमओ, सेबी आरबीआई समेत अन्य विभागों को लिखित सूचना दी लेकिन उन्हें किसी विभाग से कोई जवाब नहीं दिया गया।

गुप्ता ने बताया कि एक कंसोर्टियम ने वीडियोकाॅन ग्रुप को 40 हजार करोड़ का लोन दिया गया। यह बताया गया कि कंपनी के चलने पर लोन वापस कर दिया जायेगा। लेकिन कंपनी ने कंसोर्टियम की राशि वापस नहीं की और बैंक का पैसा डूब गया। इस लोन को एनपीए घोषित कर दिया गया। रकम डूबने के लिये कौन जिम्मेदार है। इसके जवाब में बैंक के बोर्ड का कहना है कि हमारा लोन देने का इंटरनल सिस्टम बहुत ही प्रभावी है। बोर्ड ने जनता के पैसे को लेकर ऐसा कोई आश्वासन नहीं दिया जिससे लगे कि उनका बैक में जमा धन या शेयर होल्डर का हित सुरक्षित है। बैंक का पैसा बोर्ड व बैंक के प्रबंधन की मिलीभगत से डूबा है। इसकी भरपाई कौन करेगा। इसका जवाब बोर्ड देने से कतरा रहा है। बैंक का बोर्ड अपनी जिम्मेदारी से बच नही सकता है। चंदा कोचर पर यह आरोप भी कि बाद में यह रकम उनके पति के ट्रस्ट में जमा करवा दी गयी।

विनय गोयल की रिपोर्ट

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