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एक तरफ झण्डा रोहण दूसरी ओर मौत का मातम

नयी दिल्ली।बुधवार की सुबह सारा देश स्वतंत्रता दिवस के समारोह की तैयारी में जुटा था। लेकिन शाहदरा की सत्यम एन्क्लेव में रहने वाले एक परिवार के लिये सूरज की पहली किरण ऐसा गम का पहाड़ लाने वाली रही जिसे वो जिंदगी भर न भ्ुाला पायेंगे। एक तरफ लोग आजादी का जश्न मनाने की तैयारी कर रहे थे वहीं दूसरी ओर डीडीए फ्लैट में रहने वाले परिवार के लोग अपने आठ साल के बच्चे की जान बचाने के लिये अस्पतालों के चक्कर लगाने को मजबूर था। ऐसी प्रथा जो इस परिवार के लिये कुप्रथा बन गयी जिसके चलते उनके बच्चे की अकाल मृत्यु हो गयी। उनका आठ साल का हंसता खेलता निशू उन सब को बिलखने को छोड़ गया।

सत्यम एन्क्लेव में चैथे फ्लोर पर रहने वाले राम सिंह अपने परिवार के साथ रहते हैं। उनका छोटा आठ साल का बच्चा सुबह होते ही पतंग उड़ाने के लिये पांचवीं मंजिल की छत पर जा पहुंचा। आज के दिन उड़ाने की इस प्रथा को मनाने वाले की क्या मंशा रही होगी। लेकिन यह प्रथा राम सिंह के लिये मुश्किलों का पहाड़ बन कर रह गयी। पांचवीं मंजिल पर पतंग उड़ा रहा निशू इस बात से अंजान था कि जिस छत पर वो पतंग उड़ा रहा है उस पर मुंडेर भी नहीं बनी थी। पतंग उड़ाने के जोश में निशू इस कदर मग्न था कि उसे इस बात का ध्यान भी नहीं रहा और पांचवीं मंजिल से वो सीधे पचास फिट नीचे जमीन पर धड़ाम की आवाज के साथ जा गिरा। जिस जगह बच्चा गिरा ठीक उसके पास ही केशव पार्क में जश्ने आजादी की तैयारियां चल रही थी। लाउडस्पीकर पर देशभक्ति के गीत बज रहे थे। लोग आजादी का पर्व मनाने के जुनून में थे। अचानक किसी बच्चे की चीख सुन कर चैंक गये। पार्क में मौजूद आरडब्लू के पदाधिकारियों ने नजर दौड़ाई तो उन्हें दिल को हिला देने वाला नजारा दिखा। एक आठ दस साल का बच्चा पार्क किनारे जमीन पर पड़़ा तड़प रहा था। लोगों ने यह देख कर तुरंत बच्चे को बचाने के लिये प्रयास शुरू कर दिये।

इतने में बच्चे के मां बाप वहां पहुंच गये। जिससे जो हो सका उसने तुरंत मदद की लोगों बच्चे को तुरंत पास के एक प्राइवेट अस्पताल में इलाज के लिये भर्ती करा दिया। वहां के हालात तो काफी निराशाजनक थे। लेकिन डाक्टरांे ने बताया कि बच्चा खतरे से बाहर है। लोगों की जान में जान आयी कि चलो बच्चा बच जायेगा। लेकिन शाम होते होते यह खबर आयी कि उस बच्चे ने अपने प्राण त्याग दिये। मां बाप के तो पैरों तले जमीन ही खिसक गये। पूरी कालोनी में शोक की लहर दौड़ गयी। जश्ने आजादी का पर्व फीका हो गया। जिसको देखो सिर्फ इस घटना के बारे में ही चर्चा कर रहा था। देखते ही देखते रामसिंह का परिवार बेऔलाद हो गया। उसका हंसता खेलता बच्चा काल के गाल में समा गया। उसकी इस अकाल मौत के पीछे जाने अनजाने में उसके माता पिता भी थे जिन्होंने उसे उस बिना मंुडेर वाली छत पर अकेले पतंग उड़ाने के लिये भेज दिया।

लेकिन सबसे बड़ा कारण वो आजादी की वर्षगांठ पर पतंग उड़ाने की प्रथा भी है। इस प्रथा के चलते न जाने कितने पक्षियों की गर्दनें कअती हैं। सड़को पर न जाने कितने लोगों के वाहन टकरा जाते हैं। हमें यह सोचना होगा कि इस प्रथा को किस हद तक और कि तनी सावधानी के साथ मनानी चाहिये। लोगों का पतंगें उड़ाने का जुनून राजधानी में देखा जा सकता है। पूरा परिवार इस शौक को मनाने के लिये छतों पर चढ़ जाता है। आज के समय में देखा जा रहा है कि कोई भी पर्व हो लोगों को जश्न मनाने की होड़ हो जाती है। संगीत और शराब के नशे में लोग अपना होश खो बैठते हैं। जब कोई हादसा होता है तो लोग अफसोस करने के अलावा कुछ भी नहीं कर पाते है। लेकिन पुरानी कहावत है कि अब पछताये का होत है जब चिड़िया चुग गयी खेत।

विनय गोयल

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