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वजूद बचाने के लिये नितीश और कुशवाहा के बीच जंग

नयी दिल्ली। एनडीए में अपना कद बढ़ाने के लिए बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने एनडीए के ही घटक आरएलएसपी नेता उपेंद्र कुशवाहा को राजनीतिक तौर पर खत्म करने का ऑपरेशन शुरु किया है। नीतीश ने आरएलएसपी में हुए एक पुराने विखंडन को हवा देना शुरु कर दी है।

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार क्या उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी आरएलएसपी के एक पुराने दो-फाड़ को बीजेपी की मदद से हवा दे रहे हैं जातीय आधार पर गहरे विभाजित बिहार की राजनीति पर नजर रखने वाले विश्लेषकों का तो ऐसा ही मानना है। बिहार के राजनीतिक हालात पर नजर रखने वाले एक नेता ने बताया कि इसके पीछे बिहार के मुख्यमंत्री की भूमिका ज्यादा है। उनका कहना है कि भले ही आरएलएसपी में दोफाड़ दो साल पुराना है लेकिन 2016 में हुए इस विभाजन को नीतीश कुमार ने हाल के दिनों में खूब हवा दी है। दरअसल बीजेपी गुपचुप तरीके से नीतीश कुमार के ऑपरेशन फिनिश उपेंद्र कुशवाहा में मदद कर रही है।

नीतीश और बीजेपी दोनों को ही 2019 लोकसभा चुनाव से पहले इस अभियान को पूरा करना है क्योंकि उन्हें उपेंद्र कुशवाहा की राजनीतिक ईमानदारी पर शक है। उपेंद्र कुशवाहा हाल के दिनों में आरजेडी नेता लालू यादव से मेल-मिलाप बढ़ाते रहे हैं। नीतीश कुमार और बीजेपी दोनों को ही यह मेल-मिलाप एक आंख नहीं सुहा रहा है। गौरतलब है कि जब लालू प्रसाद यादव इलाज के लिए दिल्ली के एम्स अस्पताल में भर्ती हुए थे तो उपेंद्र कुशवाहा पहले शख्स थे जो उनसे मिलने गए थे। इसके अलावा हाल ही में लालू के पुत्र और राजनीतिक वारिस तेजस्वी यादव ने भी केंद्रीय मंत्री उपेंद्र कुशवाहा को अपने साथ आने का न्योता दिया था।

बिहार की राजनीतिक पर नजर रखने वाले नेता ने कहा कि हालांकि इन वर्षों के दौरान उपेंद्र कुशवाहा सफलतापूर्वक अपनी नैया खेते रहे लेकिन अब पेंच फंसता दिख रहा है। उनका अड़ियल रवैया और अपनी बात मनवाने की हठधर्मी बीजेपी और जेडीयू दोनों को ही पंसद नहीं आ रहा। उनका कद छोटा करने के लिए नीतीश कुमार ने उपेंद्र कुशवाहा के राजनीतिक विरोधी अरुण कुमार को राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं को हवा देना शुरु कर दिया है।

इस खेल में बीजेपी नीतीश कुमार की मदद कर रही है क्योंकि कमजोर कुशवाहा को काबू करने में बीजेपी को आसानी होगी। दूसरी तरफ बिहार के एनडीए धड़े में खुद को बिग ब्रदर की भूमिका में समझने वाले नीतीश कुमार का राजनीतिक वजन लोकसभा सदस्यों के एतबार से बहुत ज्यादा नहीं है ऐसे में उन्हें मजबूत कुशवाहा एक चुनौती नजर आते हैं जो एनडीए के अंदर ही उनके लिए परेशानी का सबब बन सकते हैं। हाल के दिनों में आरएलएसपी के नागमणि यह कहते रहे हैं कि बिहार विधानसभा चुनाव में उपेंद्र कुशवाहा एनडीए का चेहरा होना चाहिए। इस बयान ने आग में घी का काम किया। उन्होंने दावा किया था कि हम जेडीयू से बड़ी पार्टी हैं लोकसभा में हमारे तीन सांसद है जबकि जेडीयू के महज दो। हम नीतीश कुमार को अपना नेता स्वीकार नहीं कर सकते।

विनय गोयल की रिपोर्ट

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