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और जिंदगी में अधूूरापन छोड़ गया मैक

मानव के जीवन में मोह, माया और तृष्णा के सिवा कुछ भी नहीं होता है। सबसे पहले लोगों को अपने बच्चों से मोह होता है। बाद में उसका मोह माया यानि दौलत से होता है। इसके अलावा जब उनके जीवन में कोई और आता है तो उसका मोह सबसे अधिक हो जाता है। उसके जीवन में आने से एक अजीब सी खुशी महसूस होती है। ऐसा ही कुछ मेरे जीवन में भी अचानक हुआ। जिस तरह उसका मेंरे जीवन में आना हुआ। उसी तरह वो हम सबको अकेला छोड़ गया। सिर्फ छह माह के अल्पकाल में मैक हमारी जिंदगी का अहम् हिस्सा बन गया। सिर्फ छह दिन की अजीब बीमारी ने उसे हमसे हमेशा हमेशा के लिये दूर कर दिया।

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साल की शुरुआत में हमारे घर में एक नये सदस्य का आगमन हुआ। बेटे ने एक अचानक एक पिल्ला लाने की बात कह कर तूफान ला दिया। घर पर इस बात का काफी विरोध किया गया। खासतौर से पत्नी ने। बेटे को काफी समझाने की कोशिश की गयी। लेकिन सबके विरोध के बाद भी मैक हमारे घर में आगमन हो गया। स्याह काले रंग का मैक कुछ दिनों का था। उसके देख सबसे पहले मेरे को कुछ अजीब सा लगाव महसूस हुआ। वह इतना छोटा था कि अपने आप कुछ खा भी नहीं सकता था। पत्नी तो पहले ही उसके विरोध में थी। फेवर में केवल दोनों भाई थे। मेरी हालत तो सांप छछूंदर की थी न हां करते बनता था और और न। कहते हैं जिसका दाना पानी लिखा होता है उसे देना ही पड़ता है। वही मैक के साथ हुआ। वह इतना छोटा था कि कुछ खा पी भी नहीं सकता था। उसको खिलाने के लिये सेरेलक बेटा लाया था। लेकिन वह इतना छोटा था कि अपने आप खा भी नहीं पा रहा था। मैंने उसे अपनी उंगलियों पोर से सेरेलक को चटाया। यह था मैक के हमारे घर में आने का पहला अनुभव। लेकिन अब दूसरी समस्या उसके लिये रहने की व्यवस्था करना था। जाडे़ के दिन थे इसलिये उसको सर्दी से बचाना था। उसे एक जूते के डिब्बे में बच्चों के पुराने स्वेटर बिछा कर लिटाया गया। लेकिन वो उससे बाहर भागने के फिराक रहता था। सारी रात यही देखते बीती कि वो कब सोयेगा।

धीरे-धीरे मैक पूरे घर का सदस्य बन गया। पास के बच्चे उसके साथ खेलने का आने लगे। छोटा सा काला मैक सबकी आंख का तारा बन गया। घर में सबसे ज्यादा विरोध करने वाली पत्नी भी उसके मोहपाश में बंधती जा रही थी। मेरा तो उससे विशेष लगाव शुरू से ही रहा। पत्नी के आगे पीछे घूमना उसकी पहली आदत थी। जब मौका पाता वह पत्नी के पैर चाटने लगता। पत्नी को पहले तो पसंद नहीं लेकिन धीरे धीरे मैक उसकी आदतों में कब शुमार होता चला इसका पता ही नहीं चला। कहते हैं कि बुझने वाला चिराग कुछ ज्यादा ही तेज रोशनी देता है ठीक ऐसा ही कुछ मैक के साथ हुआ। शुरू में हम सब उसके कम वनज को लेकर परेशान रहते थे। लेकिन दो तीन माह में ही उसका वजन बढ़ने के साथ उसके बाल और भी चमकदार हो गये। देखने में वो काफी आकर्षक दिखने लगा था। वैसे आमतौर पर लोगों का मानना था कि लैब्रा नस्ल के कुत्ते काफी शांत और आलसी होते हैं। लेकिन मैक की फुर्ती और चपलता देखते ही बनती थी। अब उसकी शरारतें भी बढ़ने लगीं थी। कोई भी वस्तु या कपड़ा उसकी जद में आया तो फट कर ही मिलती। इतना ही नहीं लकड़ी के दरवाजे और कोई भी सख्त सामान उसके खेलने के पसंददीदा खिलौने होते थे।

विनय गोयल के निजी विचार 

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