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एमसीडी पर किसका चलेगा जादू 22 अप्रैल को होगा मतदान

नयी दिल्ली। 22 अप्रैल को एक बार फिर से दिल्लीवासियों को चुनाव प्रचार झेलना पड़ेगा। अब की बार का चुनाव एमसीडी के लिये होना है। पिछले एक दशक से दिल्ली एमसीडी पर भाजपा का कब्जा चल रहा है। कांग्रेस एमसीडी पर कब्जा करने का पिछले दस साल से कर रही है। लेकिन पिछले एमसीडी के उपचुनाव में आम आदमी पार्टी ने 13 में 5 सीटों पर कब्जा कर कांग्रेस और भाजपा के लिये खतरे की घंटी बजा दी है।

इसीलिये आप ने अपने 198 प्रत्याशियों की सूची भी जारी कर दी है। शेष उम्मीदवारों की सूची भी जल्दी ऐलान हो जायेगी।
मालूम हो कि पिछले एक दशक से दिल्ली एमसीडी में भारतीय जनता पार्टी का वर्चस्व कायम है। भाजपा इस सिलसिले को बरकरार रखने के लिये हर संभव प्रयास करेगी।

इसी क्रम में पार्टी ने यह इशारा किया है कि आगामी एमसीडी के चुनावों में पार्षदों को टिकट नहीं देगी। पार्टी एससीडी के चुनावों में उन पार्टी कार्यकर्ताओं को मौका देगी जो काफी समय से अपने क्षेत्र में पार्टी के लिये कार्य कर रहे हैं। इस बार पार्षदों के टिकट भी पार्टी अध्यक्ष अमित शाह की निगरानी में किया जायेगा।

यूपी समेत अन्य प्रदेशों में अमित शाह की मंजूरी के बाद पार्टी ने प्रत्याशियों के टिकट फाइनल किये थे। इससे पार्टी को अशा से अधिक अच्छे परिणाम मिले हैं। पार्टी इसी प्रणाली के आधार पर टिकट बांट सकती है। एमसीडी चुनाव में भाजपा कोई रिस्क नहीं उठाना चाहती है। उसका सीधा मुकाबला आम आदमी पार्टी से होने जा रहा है। पिछले एमसीडी उपचुनाव में भाजपा को मात्र तीन सीटों पर ही सफलता मिली थी। कुल मिला पार्टी को नुकसान उठाना पड़ा है।
दूसरी ओर आम आदमी पार्टी भी एमसीडी चुनाव में अपनी पूरी ताकत झोंकने की तैयारी में है। इस चुनाव को सीधे तौर पर अरविंद केजरीवाल देखेंगे। पंजाब और गोवा में आम आदमी पार्टी को उम्मीद के अनुरूप सीटें नहीं मिली। इससे सबक लेते हुए आप ने दिल्ली में फोकस बनाने का फैसला कर लिया है।

दिल्ली एमसीडी के जरिये पार्टी अपने जनाधार को और भी मजबूत करने के इरादे से उतरेगी। सूत्रों की मानें तो आगामी एमसीडी चुनावों में आम आदमी पार्टी फेर बदल करने में सक्षम है। वैसे भी दिल्ली सरकार ने उस तबके को अपना लक्ष्य बनाया है जो आर्थिक रूप से कमजोर है। आम आदमी मोहल्ला क्लीनिक, मुफ्त पानी और बिजली बिलों में कटौती कर इस वर्ग को प्रभावित किया है। यही वर्ग मतदान के दिन लाइन में लग कर वोट डालता है।
कांग्रेस पार्टी के लिये दिल्ली एमसीडी चुनाव प्रतिष्ठा का सवाल बन सकता है। पिछले विधानसभा चुनाव में कांग्र्रेस का एक भी प्रत्याशी विधायक नहीं बन सका था। यहां तक कि प्रदेश अध्यक्ष अजय माकन भी अपनी सीट नहीं निकाल पाये थे। लेकिन एमसीडी के उप चुनाव में 4 सीट पर कांग्रेस के प्रत्याशियों को सफलता मिली थी। एक निर्दलीय प्रत्याशी ने जीतने के बाद कांग्रेस ज्वाइन कर ली थी।

विनय गोयल की रिपोर्ट

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