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पाखंडी बाबाओं के चेहरों से उतरते मुखौटे

नयी दिल्ली। पिछले तीन चार साल में धर्म, आडंबर और आस्था का धंधा करने वाले बाबाओं का तेजी से खुलासा हुआ है। इस साल भी गुरमीत राम रहीम और बाबा वीरेंद्र देव के पापों का घड़ा भी फूटा है। बाबा राम रहीम तो काफी जद्ो जहद के बाबा जेल की सलाखों के पीछे पहुंच गये हैं। लेकिन उनकी गिरफ्तारी से पहले कितना नाटक और हिंसा हुई उससे पूरा देश ही नहीं बल्कि दुनिया को मालूम है। वीरेंद्र देव के आश्रमों पर पूरे देश में छापे मारी हो रही है लेकिन बाबा तक पुलिस के हाथ नहीं पहुंच पाये हैं।

इससे यह अंदाज लगाया जा सकता है कि बाबाओं की पहुंच और पकड़ राजनेताओं व सरकारों पर कितनी है। बाबा को फरार हुए एक सप्ताह हो चुका है। लेकिन पुलिस उसे पकड़ना दूर उसकी लोकेशन तक नहीं पता कर पायी है। दिल्ली पुलिस पर यह आरोप लगता आ रहा है कि केन्द्र के इशारों पर विपक्षियों के विधायकों और नेताओं को पकड़ने को तत्पर रहती है।

दिल्ली में आश्रम पर छापे के दौरान लोगों ने कहा कि काफी समय से बाबा के आश्रम में हो रही अनैतिक गतिविधियों के बारे में अनेक बार पुलिस से शिकायतें की गयीं लेकिन आश्रम पर कोई कार्रवााई नहीं की गयी। इससे साफ जाहिर होता कि बाबा को पुलिस के साथ राजनैतिक शह भी प्राप्त है। बाबा के शातिराना अंदाज का पता इससे चलता है कि पूरे देश व विदेशों में कभी अपनी आईडी पर सफर ही नहीं करता है। कभी डेविड तो कभी दूसरे नाम पर टिकटों की बुकिंग करवाता है। इसलिये उसकी पहचान होने में काफी अड़चनें आ रही हैं।

दिल्ली रोहिणी में चल रहे आश्रम पर राष्ट्रीय महिला आयोग की सदस्य सुषमा साहू ने स्थानीय पुलिस अधिकारियों पर छापा मारा। वहां के नजारे देख कर तो मौजूद लोगों की आंखें खुली की खुली रह गयी। नाबालिग लड़कियों को लोहे के छोटे छोटे पिंजड़ों में कैद कर के रखा गया था। बाहर से पिंजड़ों पर बड़े बड़े ताले लटक रहे थे। सुषमा साहू को आश्रम में अंदर जाने के लिये काफी मशक्कत करनी पड़ी। वहां मौजूद आश्रम की औरतों ने महिला आयोग की टीम व पुलिस को कोई जानकारी देने व अन्य लड़कियों से मिलने नहीं दिया। लेकिन सुषमा साहू ने कहा कि उनके पास इस आश्रम के खिलाफ लोगों ने शिकायतें की हैं इस लिये वो अपने साथ पुलिस बल को भी लाई हैं। उन्हें बल प्रयोग करने पर मजबूर नहीं किया जाये।

हालात नााजुक देख सुषमा और पुलिस बल ने नाबालिग लड़कियों को ताले तोड़कर पिंजड़ों से आजाद कराया। लड़कियों को देख कर लग रहा था कि जैसे उन्हें किसी प्रकार का नशा दिया गया है। किसी भी बात का जवाब देने की स्थिति में नहीं थी। आश्रम की अधेड़ उम्र की महिला ने बताया कि बाबा इन अबोध व नाबालिग लड़कियों को देवता बता कर उनके साथ जबरन शारीरिक संबंध बनाया करता है।

यह भी बताया कि इन बच्चियों को दिन के खाने और रात को दूध मे ड्रग्स मिलाकर दी जाती हैं। इन दवाइयों के प्रभाव से ये नाबालिग बच्चियां चेतना शून्य हो जाती है और अपने साथ हो रही अश्लील हरकतो का विरोध नहीं कर पाती है। इन दवाइयों के सेवन से इन बच्चियों में उत्तेजना व सेक्स की भावना जाग जाती है। ऐसे हालात में बच्चियों के साथ बाबा अपनी मनमानी हरकते व हवस को पूरा करता है। जो बच्चियां बाबा की हवस व वासना का विरोध करती हैं उन्हें आश्रम के कारिंदों के आगे डाल दिया जाता है वो इनके साथ दरिंदगी करने से बाज नहीं आते हैं। बाबा के बारे में यह भी मालूम चला कि उसे दो शौक हैं पहला नाबालिग बच्चियों के साथ व्यभिचार करना और दूसरा आलीशान कारों का। बाबा दिन में सात आठ बार लड़कियों के साथ हवस का गंदा खेल खेलता था। महिला कर्मचारियों का काम हर बार नयी लड़की को बाबा तक पहुंचाना होता है। काम शक्ति को बढ़ाने के लिये वीरेंद्र देव अनेक प्रकार की यौन शक्ति वर्धक दवाओं का नियमित रूप से सेवन करता है। आश्रम की महिला कर्मचारियों का काम नाबालिग बच्चिों के आगे बाबा की महिमा मंडन और भगवान बताने का होता है।

हैरानी तो इस बात पर होती है देश का सारा मीडिया इस पाखंडी और दुराचारी बाबाओं पर डिबेट नहीं करता उनके माध्यमों में तीन तलाक और फर्जी राष्ट्रवाद की बहस चलती रहती हैं। सामाजिक सरोकारों को लेकर कोई टीवी चैनल या समाचार पत्र अपनी भूमिका सही तरह से निभाता नहीं दिख रहा है। सभी को अपनी टीआरपी बढ़ाने और सरकारों की झूठी तारीफ करने से फुर्सत नहीं मिलती है। क्या मोदी सरकार की न्यू इंडिया की कल्पना ऐसी है तो नहीं चाहिये हमें ऐसा नया भारत जहां पाखंडी और अधर्मी बाबा लोगों की आस्था व भोलेपन का नाजायज फायदा उठाते हैं। ये लोग उनके विश्वास को जीत कर उनके घरों की दहलीज में प्रवेश कर उनकी बहू बेटियों को अपनी हवस और वासना का शिकार बनाते हैं। अनुयायी व समर्थक सबकुछ जानते बूझते हुए झूठी सामाजिक प्रतिष्ठा के आगे लाचार हो जाते हैं। इससे बाबाओं के हौसले काफी बुलंद होते हैं और उनका धर्म आडंबर और पाखंड का धंधा अबाध गति से फल फूल रहा है।

विनय गोयल के विचार

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