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विपक्षियों की एकजुटता के आगे मोदी सरकार हाथ पांव फूल गये

इन दिनों देश की राजनीति में उबाल देखा जा रहा है। तेलुगू देशम पार्टी ने मोदी सरकार के खिलाफ संसद के दोनों सदनों में अविश्वास प्रस्ताव पेश किया है। टीडीपी के समर्थन में कांग्रेस समेत 12 विपक्षी दल भी एकजुट खड़े हैं। यह माना जा रहा है कि 2019 के आम चुनाव के पहले विपक्षियों की एकजुटता का भी टैस्ट हो जायेगा। वैसे तो मोदी सरकार और बीजेपी को विश्वास है कि इस अविश्वास प्रस्ताव का भी वही हाल होगा जो पहले वाले का हुआ था। लेकिन भाजपा को अपने घर के विभीषणों से भी निपटना होगा। हाल ही में कुछ सांसदो ने भी सरकार की नीतियों से नाराजगी जतायी थी।
विपक्ष मोदी सरकार को बेरोजगारी, गाय और गोमांस, भीड़तंत्र के बढ़ते दुस्साहस और अफवाहों को लेकर हो रही हत्याओं पर घेरने का मन बना चुकी है। साथ ही खस्ताहाल बैंकिंग, देश की अर्थ व्यवस्था, नोटबंदी और जीएसटी आदि मुददों से दुष्प्रभावों को भी संसद के सदनों में उठाने जा रही है। दूसरी तरफ एनडीए सरकार अपने पिछले चार सालों की उपलब्ध्यिों के भरोसे संसद के सदनों में अविश्वास प्रस्ताव को गिराने का पूरा प्रयास करेगी।
बीजेपी ने सत्ताधारी पार्टियों के सभी सांसदों को सदन में मौजूद रहने को कहा है। कोई सांसद यदि संसद के सदन में नहीं आया तो उस पर कड़ी कार्रवाई की घोषणा की गयी है। उस सांसद की सदस्यता भी खतरे में पड़ सकती है।
शिवसेना ने अभी तक अपने पत्ते नहीं खोले है। संसद का मानसून सत्र 18 जुलाई से शुरू हो चुका है। पहला दिन काफी हंगामेदार रहा। सरकार को विपक्ष ने कई मुद्दों पर घेरा। सरकार में मंत्रियों ने अपनी दलीलों से समझाने की काफी कोशिशें की लेकिन लामबंद हो कर विपक्षी दलों ने हमला जारी रखा। शिवसेना के दिग्गज नेता व सांसद संजय राउत ने कहा कि समय आने पर शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे के निर्देशानुसार वो फैसला करेंगे कि सरकार के पक्ष में समर्थन दिया जाये या उसके खिलाफ में।

विनय गोयल के विचार

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