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मोदी सरकार के बेवकूफ मंत्री

मोदी सरकार के बहुत मंत्री ऐसे हैं जो अपने बेवकूफी के लिये जाने जाते हैं ऐसे ही एक राज्य मंत्री हैं अश्विनी चौबे उन्होंने फरमान दे कर अपनी और सरकार की फजीहत करा डाली कि बिहार से आने वाले लोगों को एम्स में प्रवेश करने की अनुमति न दी जाये। इतना ही नहीं उन्होंने एम्स के निदेशक को यह निर्देश भी जारी कर दिया है कि सामान्य रोगों के लिये बिहार आने वाले रोगियों को एम्स के डाक्टर इलाज न करें। उनके इस बयान से नाराज डाक्टरों ने विरोध जताना शुरू कर दिया है। एक डाक्टर ने मंत्री के नाम एक खुला खत भी लिख दिया है। डाक्टरों का मानना है कि जब दिल्ली के अधिकारी और मंत्री सामान्य सर्दी जुकाम होने पर एम्स में इलाज कराने का विशेषाधिकार रखते हैं तो बिहार व अन्य प्रदेशों आने वाले रोगियों को एम्स में इलाज कराने पर प्रतिबंध कैसे लगाया जा सकता है।
चौबे का मानना है कि बिहार के लोगों एम्स में इलाज कराने से दिल्ली के एम्स में काफी भीड़ बढ़ जाती है। स्थानीय लोगों को इलाज कराने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। डाक्टरों ने मंत्री के बयान को काफी बेवकूफी भरा बताते हुए कहा कि मंत्री कैसे तय कर सकते हैं कि रोगी सामान्य रोग से पीड़ित है कि गंभीर रोग से। रोगी के परीक्षण बाद ही बताया जा सकता है कि रोगी सामान्य रोग से पीड़ित या गंभीर रोग से। मंत्री जी को यह सोचना चाहिये कि बिहार और प्रदेशों से रोगी इलाज कराने को दिल्ली आते ही क्यों हैं। उन्हें अपने जिले और प्रदेश में ही बेहतर स्वास्थ्य सेवा उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी वहां की सरकारों की है। वहां की सरकारी स्वास्थ्य सेवाएं यदि लचर हैं तो वहां के लोगों का कुसूर। इससे तो साफ जाहिर होता है केन्द्र सरकार जो दावे और वादे कर रही है सिर्फ खोखले और विज्ञापनों तक ही सीमित हैं।
मंत्री जी को रोगियों को कोसने और उन पर एम्स में प्रतिबंध लगाने की जगह बिहार व अन्य प्रदेशों में स्वास्थ्य सेवाएं बेहतर करने की दिशा में सक्रिय हों न कि ऊटपटांग बयान दे कर सरकार और अपनी विफलताओं को जाहिर करें। दिलचस्प बात तो यह है कि माननीय मंत्री बिहार से ही भाजपा के सांसद हैं। उनके इस बयान और निर्देश प्रदेशवासियों को इनकी अमानवीय टिप्पणी से जरूर अपनी गलती का एहसास हो गया होगा। लेकिन अगले चुनाव में अपनी गल्ती को जरूर सुधार लेंगे।
विनय गोयल के विचार

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