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मोदी लहर भी राजा भैया को विधायक बनने से नही रोक सकी

नयी दिल्ली। यूपी की राजनीति में निर्दलीय विधायक रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया का नाम हमेशा की तरह आज भी चर्चा में रहा है। 1993 से राजा भैया का कुडा विधानसभा में परचम लहरा रहा है। पिछले चुनाव में जहां समाजवादी पार्टी के दिग्गज नेताओं को करारी हार का सामना करना पड़ी वहीं राजा भैया ने अपनी सीट पर कब्जा बरकरार रखा है। चुनाव के पहले चुनावी विश्लेषक अनुमान लगा रहे थे कि इस बार क्या राजा भैया अपना जलवा बरकरार रख पायेंगे कि नहीं। राजा भैया ने अपने आलोचकों को करारा जवाब देते हुए सातवीं बार जीत हासिल की।

राजा भैया का शाही रुतबा

जैसा कि सब जानते हैं कि राजा भैया भदरी राजघराने के दबंग और प्रभावी राजनेता हैं। उनके परिवार में उन्होंने ही राजनीति में कदम रखा है। उन्होंने लखनऊ विवि से मिलिट्री साइंस और भारतीय मध्यकालीन इतिहास में स्नातक की डिग्री ली है। इसके अलावा उन्होंने एलएलबी भी किया है। इससे पहले उनके दादा राजा बजरंग बहादुर सिंह स्वतंत्रता संग्राम सेनानी और हिमाचल के गवर्नर थे।

राजनीतिक सफर

रघुराज प्रताप उर्फ राजा भैया ने अपना राजनीतिक सफर 1993 में कुंडा विधानसभा से निर्दलीय चुनाव जीत कर शुरू किया था। तब से राजा भैया वहां के अजेय विधायक बने हुए हैं। उनसे पहले कांग्रेस के नियाज हसन का वहां परचम लहराता था। उनका जलवा इस कदर है कि प्रदेश में वो कल्याण सिंह, राजनाथ सिंह, रामप्रकाश गुप्ता के मुख्यमंत्रित्व काल में मंत्री रह चुके हैं। इतना नहीं उन्हें समाजवादी पार्टी के सुप्रीमो मुलायम सिंह और उनके बेटे अखिलेश ने भी अपने शासन काल में मंत्री पद से नवाजा है।

विनय गोयल की रिपोर्ट

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