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2019 में मोदी की नहीं बनेगी सरकार : मार्गन स्टैनली

नयी दिल्ली। आगामी आम चुनाव में सरकार किसकी बनेगी इस बात पर चर्चा शुरू हो गयी है। यह चर्चा न केवल भारत में बल्कि विदेशों में भी चलने लगी है। मोदी सरकार के चार सालों में आम जनता को बेरोजगारी, आर्थिक विपन्नता, कमजोर अर्थ व्यवस्था से छुटकारा मिलना तो दूर हालात और भी बद्तर हो गये है। देश का युवा, किसान, व्यापारी और आम जनता महंगाई, बेरोजगारी, बाजार और खराब आर्थिक नीतियों से बुरी तरह जूझ रही है। इन्हीं सब मुद्दों को देखते हुए अमेरिकी कंपनी मॉर्गन स्टैनली ने यह कहा है कि मोदी सरकार का दोबारा सत्ता पाना मुमकिन नहीं है। पिछले एक साल में विपक्ष ने मोदी सरकार को हर पहलू पर विफल करार दिया है। सारा विपक्ष लामबंद हो कर आगामी आम चुनाव में सरकार को पटखनी देने की पुरजोर कोशिश में जुटा है।

अमेरिकी कंपनी मॉर्गन स्‍टैनली ने कहा है कि 2019 में भारत में किसी गठबंधन की कमजोर सरकार बनने की संभावना है। कंपनी की यह रिपोर्ट पीएम नरेंद्र मोदी के दोबारा सत्‍ता में आने की संभावनाओं को झटका है। केंद्र की मोदी सरकार और सत्ताधारी बीजेपी से लोगों का भरोसा कम हुआ है। पिछले तीन साल में कमजोर आर्थिक वृद्धि, नोटबंदी और जीएसटी के कारण डगमगाई अर्थव्यवस्था और करीब 20 हजार करोड़ के पीएनबी महाघोटाले के चलते प्रधानमंत्री मोदी की साख गिरी है। इतना ही नहीं हाल के दिनों में कठुआ और उन्नाव जैसी घटनाओं को लेकर भी लोगों खासकर युवाओं में सरकार को लेकर नाराजगी है।

इसके चलते अगले लोकसभा चुनाव में मोदी सरकार या बीजेपी का अपने दम पर सत्ता में वापस आने के आसार कम ही हैं। एक न्यूज रिपोर्ट में अमेरिकी फर्म मॉर्गन स्टेनली की रिपोर्ट के हवाले से कहा गया है कि लोकसभा चुनाव 2019 में अभी एक साल का वक्‍त बचा है लेकिन चुनाव से जुड़े पंडित अभी से ही आगामी सरकार को लेकर अटकलें लगाने लगे हैं। ऐसे में नरेंद्र मोदी के फिर से अपने दम पर सत्‍ता में आने को लेकर कयासों का दौर भी शुरू हो गया है। मॉर्गन स्‍टैनली के मुताबिक अगले साल हो सकता है केंद्र में गठबंधन की कमजोर सरकार बने।कंपनी की रिपोर्ट की मानें तो अगले साल कोई पार्टी अपने बूते सरकार नहीं बना पाएगी। ऐसे में बीजेपी भी अपने दम पर सरकार नहीं बना पाएगी।रिपोर्ट में कहा गया है कि केंद्र में गठबंधन की कमजोर सरकार बनने की संभावनाओं के बीच बाजार में आशा और उम्‍मीद रहने की संभावना बेहद कम है। अमेरिकी फर्म ने चेतावनी दी है कि 2019 में बाजार का माहौल साल 2014 के आम चुनावों से पहले जैसा नहीं रहेगा।

र्मार्गन स्‍टैनली ने पिछले पांच आम चुनावों के आधार पर यह निष्‍कर्ष निकाला है। कंपनी का कहना है कि 90 के दशक के मध्‍य से कोई भी सरकार पूर्ण बहुमत के साथ चुनाव में नहीं गई है।रिपोर्ट में कहा गया है कि अगले लोकसभा चुनाव के नतीजे चार बातों पर निर्भर करेंगे:वास्तविक विकास दर – भले ही हाल के महीनों में विकास दर 7 फीसदी के आसपास नजर आ रही हो, लेकिन नोटबंदी के बाद यह सबसे निचले स्तर यानी 5.7 फीसदी पर पहुंच गई थी। ऐसे में कमजोर आर्थिक वृद्धि सत्ताधारी बीजेपी के लिए खतरे की घंटी हो सकती हैयुवा वोटर – देश में इस समय 18 से 28 आयुवर्ग के मतदाताओं की संख्या करीब 25 करोड़ है। बीजेपी को पिछले चुनाव में करीब 17.2 करोड़ वोट मिले थे। युवा वोटर को रिझाने के लिए कुछ अहम मुद्दों और प्रचार के तरीकों पर ध्यान जाना होगा। लेकिन मौजूदा हालात में युवा सरकार ने नाराज नजर आता है।यूपी – महाराष्ट्र में गठबंधन – इन दो राज्यों से लोकसभा में 128 सांसद आते हैं। इन दोनों राज्यों में बनने वाले राजनीतिक गठबंधन अगले लोकसभा चुनावों का रुख तय कर देंगे।अर्थव्यवस्था के 8 संकेत – रोजगार वृद्धि, किसानों की खुशहाली, फसलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य, डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर, उपभोक्ता महंगाई दर, गांवों में मजदूरी में बढ़ोत्तरी, ट्रैक्टर की बिक्री और दो-पहिया वाहनों की मांग। ये ऐसे 8 संकेत हैं कि इनमें मजबूती नहीं आई तो बीजेपी की अगुवाई में सरकार बनने की संभावना खत्म हो जाएगी।

रिपोर्ट में चुनावी नतीजों के कुछ संभावित आंकलन किए गए हैं। चार आंकलन में से तीन आंकलन संकेत देते हैं कि अगले चुनाव में कोई भी राष्ट्रीय दल अपने दम पर सरकार नहीं बना पाएगा और उसे सरकार बनाने के लिए उसे दूसरे दलों की मदद लेनी पड़ेगी। रिपोर्ट में ऐसी स्थिति में किसी भी राष्ट्रीय दल के लिए अधिकतम सीटें 180 से 220 मिलने का अनुमान लगाया गया है।मॉर्गन स्‍टैनली का कहना है कि बाजार का रुख अगले आम चुनाव में पिछले लोकसभा चुनाव की तरह आशावादी नहीं रहेगा। कंपनी ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि, ‘बाजार हमेशा मौजूदा सरकार से ज्‍यादा मजबूत सरकार की उम्‍मीद के साथ चुनाव में जाता है। लेकिन, अगले साल यानी 2019 के चुनावों में यह लागू नहीं होगा, क्‍योंकि अगले साल मौजूदा से कमजोर सरकार बनने की संभावना है।

विनय गोयल की रिपोर्ट

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