Breaking News
Home / खुला खत / बिहार में तेजस्वी और यूपी में बुआ-भतीजे से हारे मोदी-योगी
bhabhua-bihar-live-bypol

बिहार में तेजस्वी और यूपी में बुआ-भतीजे से हारे मोदी-योगी

बिहार और प्रदेश में हुए उप आम व विधानसभा चुनावों में भाजपा-जेडीयू को करारा झटका लगा है। बिहार में आरजेडी के युवा तुर्क तेजस्वी और यूपी में बुआ भतीजे ने बीजेपी के किले को ध्वस्त कर दिया है। चुनाव परिणाम आने से पहले भाजपा नेता और यूपी के सीएम योगी अखिलेश-माया के गठबंधन पर तंज कस रहे थे। लेकिन परिणामों ने उनके मुंह पर ताला जड़ दिया है। उपचुनावों के परिणामों ने भाजपा और मोदी सरकार के माथे पर सलवटें ला दी है। 2019 में आमचुनाव होने हैं उससे लगभग साल भर पहले इस तरह के घातक परिणामों की कल्पना बीजेपी नेतृत्व को नहीं थी। हाल में ही भाजपा ने गुजरात समेत त्रिपुरा, मेघालय और नागालैंड में गठबंधन सरकारें बनायी है।

शायद यही वजह रही कि मोदी सरकार और बीजेपी दोनों ही सत्ता के नशे में चूर हो गयीं। उसकी परणिति उपचुनावों के परिणाम दर्शा रहे हैं। भाजपा नेतृत्व भले ही इस हार को गंभीर समस्या न बताने का नाटक कर रहा है। लेकिन अंदर ही अंदर बीजेपी बुरी तरह से हिल गयी है। यूपी में योगी की गोरखपुर और केशव प्रसाद की फूलपुर सीट का हारना इस बात का संकेत है कि योगी सरकार के एक साल का कार्यकाल प्रदेश की जनता को रास नहीं आया है उसकी प्रतिध्वनि उपचुनाव में सुनायी पड़ी है। यह परिणाम भाजपा के लिये चेताने के लिये काफी हैं। अगर समय रहते पार्टी ने अपना रवैया और नीतियों में आमूल चूल परिवर्तन नहीं किये तो मोदी के लिये आने वाला आम चुनाव इतना आसान नहीं होगा।

चुनाव से पहले योगी आदित्यनाथ ने चुनावी सभाओं में यह कहा था कि उप चुनाव में सपा बसपा का गठबंधन सांप छछूंदर का है। जनता इन्हें अच्छा सबक सिखायेगी। किसी भाजपा नेता ने कहा था कि मुलायम सिंह रावण हैं और अखिलेश मेघनाद जो हाल रावण और मेघनाद का हुआ था वही हाल इनका होगा। मायावती को तो शूर्पणखा तक कह डाला था। लेकिन यह सब बातें भाजपा के लिये आत्मघाती सिद्ध हुई। जनता ने भाजपा के उम्मीदवारों को हार का स्वाद चखाते हुए सपा-बसपा समर्थित उम्मीदवारों को भारी मतों से विजयी बना दिया। भाजपा के लिये यह चुनाव 2015 में बिहार विधानसभा चुनाव की तरह साबित हुआ। वहां पीएम मोदी और बीजेपी अध्यक्ष शाह ने विपक्षी दलों को खूब निशाने पर रखते हुए यहां तक कह दिया था कि जेडीयू नेता व तत्कालीन सीएम नितीश कुमार के डीएनए पर ही सवाल लगा दिये थे। यह बात और है कि वहीं नितीश कुमार सत्ता के लोभ में एक बार फिर एनडीए में शामिल हो गये। उन्हांने दो साल पहले हुए महागठबंधन से नाता तोड़ लिया। भाजपा से समर्थन के लेकर एक बार बिहार की सत्ता पर काबिज हो गये।

इस उपचुनाव में बिहार के मतदाताओं ने एक बार फिर आरजेडी व लालू प्रसाद में विश्वास जताया। बिहार चुनाव में अररिया संसदीय क्षेत्र व जहानाबाद विधानसभा में आरजेडी के प्रत्याशियों भारी मतों से जिता दिया। इससे एक बात साबित हो गयी कि नितीश कुमार का भाजपा से समर्थन लेकर सरकार बनाना और महागठबंधन से हटना प्रदेश की जनता को रास नहीं आया। जनता और राजेडी नेताओं का मानना है कि जेडीयू और नितीश कुमार ने 2015 विधानसभा में आये परिणामों का स्वार्थ के लिये विश्वासघात किया है।

इसी का नतीजा यह रहा कि 3 उपचुनावां में मात्र एक सीट पर भाजपा उम्मीदवार विजयी हो सका। अब यदि यूपी उपचुनाव की बात करें तो भाजपा नेता और सरकार अतिउत्साहित थी। इसलिये सपा-बसपा के गठबंधन को बहुत ही हल्के में लिया। वहीं सपा सुप्रीमो अखिलेश और बसपा प्रमुख मायावती ने पिछले साल हुए विधानसभा चुनावों से सीख लेते हुए आपस के गिलेशिकवे भुलाते हुए आपसी तालमेल को अहमियत दी। इसका परिणाम यह हुआ कि यूपी के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य की सीट इस गठबंधन ने हथिया ली। यहां सपा प्रत्याशी नागेंद्र बहादुर सिंह ने भाजपा प्रत्याशी को लगभग साठ हजार के भारी अंतर से मात दी। उपचुनाव के रिजल्ट से जहां भाजपा खेमे में मातम पसर गया वहीं दूसरी ओर सपा और बसपा के चेहरे इस शानदार सफलता से खिल उठे हैं। अगर यह कहा जाये कि उपचुनावों के परिणामों ने सपा-बसपा को संजीवनी दे दी है तो यह गलत न होगा।

विनय गोयल के विचार

Next9news

Check Also

sc padmavat

पद्मावत के विरोधियों पर सुप्रीम कोर्ट तमाचा

चर्चित फिल्म पद्मावती को लेकर पिछले कई महीनों से अफवाहें उड़ाई जा रही थीं। उसके …