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मां एक अलग एहसास है…

मां शब्द से एक अलग ही एहसास जुड़ा हुआ है, जिसके लिए जितनी बातें कहीं जाएं और जितनी पंक्तियां लिखी जाएं, वो शायद कम ही होंगी। मां की ममता जैसी बात किसी और रिश्ते में नहीं होती और शायद तभी कहा जाता है, कि मां किसी फरिश्ते से कम नहीं होती। अगर इस धरती पर जीता जागता भगवान का रुप देखना हो तो आप मां को देख सकते हैं। जब हम छोटे होते हैं तो हमें मां की सबसे ज्यादा जरुरत होती है, लेकिन जैसे-जैसे हम बड़े होते जाते हैं, वो मां ही हमारी आंखों में खटकने लगती हैं। ना जानें क्यों अचानक सबसे प्यारी लगने वाली मां को लेकर मन में ये ख्याल आने लगता है कि वो हमारी निजी जिंदगी में दखल दे रही है। ऐसा सिर्फ इसलिए होता है क्योंकि बड़े होने के बाद इस दुनिया की भीड़ में आप कहीं खो जाते हो और आपके ऊपर बाकी सारे लोगों की सोच हावी होने लगती है।

मगर जब मुसीबतों का पहाड़ टूटता है तो फिर से न जानें क्यों उसी मां को ही गले लगाने को जी चाहता हैं, उसकी गोद में सर रखकर सोने को जी चाहता है और ये सिर्फ इसलिए क्योंकि ये सच्चाई शायद आप जानते हो कि एक मां ही है जिसके कदमों में सारा संसार है। इस दुनिया की भीड़ से आपको कैसे बचाना है ये एक मां ही अच्छी तरह से जानती है, तो अब-जब आप घर लौटों तो जरा एक बार इस अपने दिमाग से दुनिया भर के ख्यालों या फिर यूं कहें कि जमाने की जद्दोजहद से खुद को अलग करके अपनी मां के साथ सुकून के चंद पल जरुर बिताना या फिर मां से दो घड़ी बात करना मत भूलना।

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