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मां की ममता का कर्ज़…

मां तू ममता की धनी,

मैं कंगला रह गया

बचपन में सुना लोरी

सोचा सुनाऊं भजन चोरी

पड़ी पैनी नज़र उसकी…

कड़वा वचन बोल चला गया

तेरा दूध पीकर भी,

मैं चंडाल बन गया

तरसे तू रोटी के खातिर

खिलाने निकला तुझे रोटी

पड़ी पैनी नज़र उसकी…

कुतिया को डाल चला गया

तेरे आंचल की गरमाहट

मैं उर्जावान बन गया

तू ठिठुरे माघ की ठंड में

ओढ़ाने निकला तुझे कंबल

पड़ी पैनी नज़र उसकी…

पानी में डाल चला गया

तेरे बचपन की मालिश

मैं बलवान बन गया

तेरे बुढ़ापे का ख्याल आया

निकला था आंसू पोंछने

पड़ी पैनी नज़र उसकी…

आंखों में आंसू डाल चला गया

तुम्हारे गुज़रने की ख़बर

मैं बेहाल हो गया

सबकुछ पास होकर भी

मैं कंगाल हो गया 

पड़ी पैनी नज़र उसकी…

पैनी नज़र को ही पत्थर मार चला गया

~एस. प्रसाद

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इस कविता के माध्यम से कवि यह महसूस कराने की कोशिश करता है, कि मां का दिल तो मां का ही होता है, हर परेशानियों के बावजूद वो अपने बच्चे को बेहद प्यार करती है। हर कमियों के बावजूद भी मरते समय तक अपने बच्चों से उम्मीद नहीं छोड़ती लेकिन कहीं ना कहीं समाज की विडंबना कुछ नासमझ लोगों को इस कदर अंधा बना देती है, कि वो लोग अपने भविष्य की परवाह किये बिना ये सोच लेते हैं, कि हमारी खुशियों में उन बेसहारा लोगों की कोई जरूरत नहीं है, जबकि यह नहीं समझ पाते कि हमारे भी बच्चे जब इस तरह से करेंगे, तो उन पलों को याद करके हमारी आंखों में आंसू के सिवा और कुछ नहीं होगा। जो लोग भी अपनी मां की जरूरतों को किसी भी वजह से नज़रअंदाज़ करते हैं, वो लोग अगर अच्छे तरीके से सोचें तो एक मां जो पूरे परिवार को अपना समझती है, वहीं परिवार के लोग भी पूरी तरह से अपना समझें तो वही घर स्वर्ग से भी सुंदर हो जाएगा और मां का आशिर्वाद कभी बुरी नज़रों को अपने परिवार की तरफ नहीं आने देगा।

जैसे मां तो मां होती है, बचपन से जवानी तक, जवानी से बुढ़ापे तक हमेशा अपने आप को साबित करती है, कि तू मेरा लाल है कंगाल नहीं, तू मेरी छांव है धूप नहीं, तू मेरा उजाला है अंधकार नहीं, उसके लिये अपने बच्चों से प्यारा और सुंदर इस दुनिया में कोई नहीं है। फिर भी घर का मुखिया होने के बावजूद हम अपनी मां को थोड़ी सी खुशियां देने में कंगाल क्यों हो जाते हैं। अगर “उसकी पैनी नज़र” से डर लगता है तो उसे समझाने की जरूरत है कि जिस तरह से तुम मेरी जरूरत हो और वो मेरा सम्मान है, यही संस्कार एक दिन हमारे बच्चों में आयेगा और वो अपने जीवन साथी को जरूरत और हमें अपना सम्मान समझेंगे, यही जीवन की रीत है। 

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