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मुसलमानों की आहें क्यो सुनाई नहीं देती?

वाराणसी: मोहब्बत की दास्तान को अपने शब्दों में सजोकर रखने वाले देश के मसहूर शायर मुनव्वर राणा ने पाकिस्तान के साथ जारी विवाद को खत्म करने की वकालत करते हुए कहा कि संगीत, साहित्य व कला पर रोक नहीं लगाना चाहिए बल्कि इनका आदान-प्रदान के जरिए भारत को अपने खिड़की और दरवाजे खुले रखने चाहिए।

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मुनव्वर राणा वैसे तो चर्चाओं में बने रहते हैं लेकिन इस बार मुसलमानों की दशा पर चितिंत होते हुए कहा कि पीएम को दलितो का दुख तो दिखता हैं मगर मुसलमानों की आहें नहीं सुनाई देती उन्हें। अब तो उर्दू भाषा को आतंकवाद की पहचान बना दिय़ा गया हैं। अगर मुल्क की पुलिस किसी मुसलमान को पकड़ती हैं और उसकी जेब से उर्दू जबान में लिखा खत बरामद हो गया तो उसे आतंकवादी घोषित कर दिया जाता हैं।

मुनव्वर राणा आगे कहते हैं कि उर्दू जुबान पर दो बार बिजली गिर चुकी हैं। एक बार जब मुल्क का बंटवारा हुआ तो दूसरी बार जब बाबरी मस्जिद गिरी। मुनव्वर राणा ने कहा कि अंग्रेजो ने अपना असलहा बेचने के लिए इस मुल्क को तीन हिस्सों में बाट दिया (भारत, पाकिस्तान और बांग्लादेश)

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मुनव्वर राणा ने उर्दू अकादमी बंद कर जिलों में मजिस्ट्रेट की निगरानी में ऐसी संस्था बनाने का सुझाव दिया, जो सब पर निगाह रख सके और इसका सालाना बजट 100 करोड़ रुपए हो। इसके साथ ही पुरूस्कार वापसी को लेकर कहा कि पुरूस्कार तो कईयों ने लौटाएं हैं मगर अब मैं कोई भी पुरूस्कार नहीं लूंगा।

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