Breaking News
Home / देश / यूपी और बिहार के लड़के आमचुनाव 2019 में रोकेंगे मोदी का विजय रथ
tejashwi_rahul and akhiles

यूपी और बिहार के लड़के आमचुनाव 2019 में रोकेंगे मोदी का विजय रथ

नयी दिल्ली। आगामी आम चुनाव 2019 के लिये पूरे देश में यह चर्चा आम है कि क्या मोदी मैजिक एक बार फिर सिर चढ़ कर बोलेगा। एक बार फिर क्या अमित शाह की रणनीति 2014 वाला जादू कायम रख सकेंगे। मोदी के हाथ दोबारपीएम का ताज सजेगा। क्या विपक्षियों को एक बार फिर मुंह की खानी पड़ेगी। इन सब सवालों का जवाब भविष्य के गर्भ में है। लेकिन एक बात तो है कि यूपी और बिहार में सरकार और पार्टी का 2014 वाला रुतबा अब नजर नहीं आ रहा है। इसकी बानगी हाल के उपचुनावों में देखी जा सकती है। सरकार व भाजपा को सपा, बसपा और रालोद के गठबंधन ने छठी का दूध याद दिला दिया है। यूपी और बिहार में मिली करारी हार से सरकारें और पार्टियां दोनों ही तिलमिला कर रह गयी हैं।
यूपी में पूर्व सीएम अखिलेश यादव ने अपने करिश्माई तरीकों से बसपा अध्यक्ष मायावती को उपचुनावों में समर्थन के लिये तैयार कर लिया साथ आगामी आम चुनावों में मिलकर भाजपा को धूल चटाने के लिये भी राजी कर लिया है। पिछले विधानसभा में अखिलेश ने कांग्रेस को भी अपने साथ लेकर चुनाव लड़ने का फैसला किया था। लेकिन उससे फायदा तो नहीं मिला उल्टा नुकसान उठाना पड़ा था। उनके इस फैसले का उनके पिता मुलायम सिंह ने भी खुलकर विरोध किया था। लेकिन अखिलेश ने यूपी के गोरखपुर, फूलपुर और कैराना उपचुनावों में अपनी राजनीतिक कुशलता और सामंजस्य का परिचय देते हुए यूपी सरकार और बीजेपी को करारी शिकस्त दी। इन उपचुनावों में मिली जीत से जहां भाजपा और सरकार के पैरों तले जमीन खिसकी है वहीं सपा, बसपा और रालोद को एक फिर यूपी में अपनी खोई साख वापस पाने का मौका मिला है।

युवा राजीतिज्ञों के बच्चों में अखिलेश ही एकमात्र उच्च शिक्षित नेता बन कर उभरे हैं जिन्होंने बहुत ही कम समय में यूपी जैसे अहम् प्रदेश में पूरे पांच साल सरकार चलाई। इतना ही नहीं उन्हांने जनता के बीच एक साफ सुथरी वाले युवा नेता की छवि भी बनायी है। दिन ब दिन उनका व्यक्तित्व निखरता ही जा रहा है। अपने विपक्षियों के खिलाफ भी कोई बड़बोला बयान न देना भी उनकी खूबियों गिना जा सकता है। प्रेसवार्ताओं में भी तीखे सवालों के सामने भी वो अपने ऊपर संयम बनाये रखते हैं। उनकी उस अदा पर मीडिया भी फिदा हो गयी है।

दूसरी ओर बिहार के लाल और राजेडी प्रमुख लालू यादव के छोटे बेटे तेजस्वी यादव ने भी बहुत भी कम समय में अपनी छवि एक तेज तर्रार नेता के रूप बना ली है। महागठबंधन की सरकार में वो उपमुख्य मंत्री बने। लेकिन नितीश कुमार ने पाला बदलते हुए महागठबंधन सरकार से दामन छुड़ा कर बीजेपी से गठजोड कर लिया। सुशासन बाबू की मौका परस्ती से राजेडी प्रमुख लालू यादव व उनके परिवार पर शनि मंडराने लगा। केन्द्र ने ईडी,सीबीआई और ईओयू लगा दी। लालू को चारा घोटाले में अनेक मामलों में दोषी बताया गया और उन्हें जेल भेज दिया गया ताकि बिहार में बीजेपी जेडीयू सरकार के खिलाफ कोई मुहिम न छेड़ सकें। लेकिन बिहार उपचुनाव में तेजस्वी ने अपने चचा नितीश कुमार को बुरी तरह पटखनी देते हुए लोकसभा और विधानसभा में अपने उम्मीदवारों को जितवा दिया। इससे राजेडी में एक नया जोश देखा जा रहा है। तेजस्वी ने बीते छह माह में अपने आप में गुणात्मक सुधार किया है। वो लगातार मौका पाते ही सरकार के खिलाफ विपक्ष को साथ लेकर धरना प्रदर्शन कर रहे हैं। पत्रकारों से बात करते हुए वो अपना पक्ष किस तरह रखें यह बात उन्हें समझ में आनी लगी है। कठिन सवालो का जवाब देने की कला उनमें देखी जा सकती है।

आगामी आम चुनाव में सपा, बसपा, राजद, सीपीएम, टीएमसी,टीडीपी, जेडीएस, रालोद, आम आदमी पार्टी, कमला हसन की पार्टी समेत कांग्रेस महागठबधन हिस्सा बन सकती हैं। शिवसेना ने भी अपने उग्र बयानों से भाजपा खेमे में हड़कंप मचा रखा है। ऐसे में पूरा विपक्ष ही मोदी सरकार के खिलाफ लामबंद होता दिख रहा है। ऐसे में मोदी सरकार को फिर सत्ता मिलना टेढ़ी खीर ही दिख रही है।

विनय गोयल की रिपोर्ट

Next9news

Check Also

indore-girl-chemical-attack

सेलिब्रिटी लड़की ने शादी से मना किया तो युवक ने चेहरे पर डाला एसिड

नयी दिल्ली। मध्य प्रदेश के इंदौर में 21 साल की युवती के उपर केमिकल अटैक …