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nitesh kumar

एक नई पारी के साथ हुआ महागठबंधन का अंत….

बिहार में एक बार फिर से नीतीश कुमार की सरकार है लेकिन इस बार महागठबंधन के साथ नहीं बीजेपी के साथ। बुधवार शाम साढ़े छ: बजे नीतीश कुमार ने इस्तीफा दिया और अगले ही दिन यानी गुरुवार 27 जुलाई को नीतीश कुमार ने दुबारा से सपथ ग्रहण भी कर लिया। कल शाम जब मुख्यमंत्री ने इस्तीफा दिया था उसके बाद से ही बिहार की राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई थी। इस्तीफा देने के नीतीश कुमार ने पहले लालू यादव और फिर राहुल गांधी पर भी महागठबंधन को नहीं बचाने का आरोप लगाया। जिसके बाद लालू यादव ने भी प्रेस कॉन्फ्रेंस कर नीतीश  कुमार के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए ये कह दिया कि नीतीश मर्डर केस में जेल जाने से डर गए इसके वजह से उन्होंने गठबंधन को तोड़ा है तेजस्वी यादव के इस्तीफे को लेकर कोई बात नहीं है। लेकिन आरोप लगाने के बाद लालू यादव ने दुबारा कहा कि आप आईए हम मिल कर बात करते हैं और ना आप होंगे ना तेजस्वी दुबारा से सरकार बनाते हैं लेकिन रात में ही बीजेपी के समर्थन करने के बाद सरकार बनाने का दावा कर दिया गया और सुबह होते होते दुबारा से सरकार भी बन गई। ये राजनीतिक पहेली बहुतों के लिए पहली बार हो रही होगी जब रातों-रात सरकार बनती है सरकार गिर जाती है।

लेकिन इसके साथ ही इस नए गठबंधन को लेकर कई सारे सावल उठने शुरू हो गए हैं कि विपक्ष के नेता जिस विपक्षी एकता की बात कर रहे थे उसका क्या होगा। बिहार की तरह यूपी में भी महागठबंधन बनाने की बात कही जा रही थी, लेकिन जो गठबंधन बिहार में नहीं चला क्या यूपी की पार्टियां महागठबंधन करके ये जोखिम उठाएंगी। लेकिन सवाल सिर्फ इतना ही नहीं है कि सवाल बिहार के विकास का भी है क्योंकि नीतीश कुमार ने इस्तीफा देने के बाद यही कहा था कि जो बिहार के हित में होगा मैं वही करूंगा तो क्या एक बार फिर जब नीतीश  कुमार बीजेपी के साथ हैं तो यह सिर्फ बिहार के विकास के लिए है। तो क्या पिछले 20 महीने से जब नीतीश कुमार महागठबंधन में थे तो वो बिहार के साथ धोखा कर रहे थे। लेकिन हो जो कुछ भी छठी बार नीतीश कुमार ने बिहार के मुख्यमंत्री के रुप में शपथ ग्रहण की और सुशील मोदी एक बार फिर उपमुख्यमंत्री के रुप में शपथ ग्रहण कर लिया।

इस शपथ ग्रहण के बाद रांची में सीबीआई के विशेष कोर्ट में पेशी होने के बाद लालू यादव ने मीडिया से बातचीत में नीतीश कुमार के खिलाफ बहुत सारी बातें कहीं और नीतीश कुमार पर आरोप लगाया कि ये जो बिहार में सत्ता परिवर्तन हुआ है वो पहले से ही तय था, नीतीश कुमार ने हमें धोखा दिया है, लालू ने कहा कि नीतीश ने कभी नहीं कहा कि तेजस्वी तुम इस्तीफा दे दो, नीतीश ने कहा था कि तुम पर जो चार्ज लगाया गया है जनता के बीच जा के सफाई दे दो। लेकिन लालू प्रसाद यादव ने इस पर कहा कि हमें तेजस्वी के वकीलों ने यह सलाह दी थी कि यह केस फर्जी है आपको मीडिया या जनता के बीच जा के सफाई देने की जरुरत नहीं है। हमसे सीबीआई जो सवाल पूछेगी हम उसका जवाब दे देगें। तो सबसे बड़ा सवाल यह है कि जो लालू यादव पानी पी पीकर के सीबीआई को कोसते रहते हैं और कहते हैं कि सीबीआई केन्द्र सरकार के इशारे पर चल रही है तो उस सीबीआई पर लालू यादव को जनता से ज्यादा भरोसा है कि वे जनता को जवाब ना देकर सीबीआई को जवाब देना ज्यादा अच्छा समझा।

इसके अलावा लालू यादव के साथ कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने कहा कि हमें ये बात दो तीन महीने पहले ही पता थी कि नीतीश कुमार महागठबंधन छोड़ कर बीजेपी के साथ जाने वाले हैं। अगर इस बात में सच्चाई है तो लालू यादव और राहुल गांधी ने महागठबंधन को बचाने के लिए कोई प्रयास कोई नहीं किया। क्या लालू यादव तेजस्वी यादव का इस्तीफा दिलाकर जिसकी चर्चा मीडिया में तो थी लेकिन स्पष्ट तौर पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने तेजस्वी यादव से इस्तीफा नहीं मांगा था लेकिन वो ऐसा करके महागठबंधन को बचा सकते थे। फिलहाल इन सब में सबसे अधिक फायदा तो बीजेपी को ही पहुंचा और इसी के साथ बीजेपी के खाते में एक और राज्य शामिल हो गया। अब देखना ये दिलचस्प होगा कि विपक्षी पार्टीयों का अगला रुख क्या होता है। और सुशासन बाबू नीतीश कुमार को बिहार की राजनीति में आगे कितना फायदा मिलेगा। फिलहाल नीतीश कुमार को तो कोई नुकसान नहीं दिख रहा लेकिन ये कितने दिन बरकरार रहता है ये देखना अभी बाकी है। क्योंकि 19 साल का गठबंधन टूट सकता है तो उसके बाद 20 महीने का भी गठबंधन टूट सकता है तो क्या ये दुबारा से मोदी के साथ वाला गठबंधन कितना दिन टिकता है और इसकी विरासत क्या होगी देखना वाकई दिलचस्प होगा।

लव कुमार के निजी विचार 

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