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महागठबंधन में नितीश को किया जायेगा पीएम प्रोजेक्ट!

यूपी में करारी हार मिलने से कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के हौसले पस्त हो चुके हैं। प्रदेश में भारी बहुमत पाने वाली बीजेपी को विपक्षियों पर तंज कसने का एक बार फिर मौका मिल गया है। लेकिन विपक्षियों की खराब हालत देख बिहार के सीएम नितीश कुमार का ग्राफ बढ़ता दिख रहा है। उनके समर्थकों ने तो यह कहना भी शुरू कर दिया है कि अगर 2019 में मोदी को टक्कर देना है तो नितीश कुमार को पीएम प्रोजेक्ट करना बहुत जरूरी है।
यूपी में सत्ताधारी सपा सरकार के हारने के कई कारण हो सकते हैं। उनमें एक कारण उनकी पारिवारिक कलह भी हो सकती है। चुनाव के आसपास समाजवादी परिवार में जो उठापटक हुई उससे पार्टी की काफी नुकसान हुआ ऐसा पार्टी के लोग मान रहे हैं। मुलायम, शिवपाल और अखिलेश के बीच सार्वजनिक रूप से घटा लोगों में पार्टी के प्रति विश्वास खो गया।

जनता में यह संदेश गया कि समाजवादी पार्टी में सत्ता की भूख से परिवार में ही फूट पड़ गयी है। यहां तक कि अखिलेश ने पार्टी से अमर सिंह को बाहर करते हुए शिवपाल को प्रदेश अध्यक्ष पद से हटा दिया। इतना ही नहीं विशेष अधिवेशन बुलाकर प्रो. रामगोपाल ने मुलायम के अध्यक्ष पद से हटवा कर अखिलेश को पार्टी की कमान सौंप दी।

इससे मुलायम और शिवपाल अंदर ही अंदर अखिलेश से चिढ़ गये। शिवपाल ने तो यह ऐलिन कर दिया कि चुनाव बाद वो नयी पार्टी बनायेंगे। मुलायम और शिवपाल ने अखिलेश के प्रत्याशियों का प्रचार भी नहीं किया। इसका फायदा बीजेपी ने उठाते हुए धुआंधार प्रचार करते हुए प्रदेश सरकार की नाकामियों को जनता तक पहुंचाया।

दूसरा बड़ा कारण पार्टी के कुछ नेता मानते हैं कि प्रदेश में पार्टी के हारने का एक प्रमुख कारण कांग्रेस से गठबंधन करना भी है। इस गठबंधन के खिलाफ मुलायम सिंह और शिवपाल दोनों ही थे। लेकिन अखिलेश उनके विरोध के बावजूद राहुल गांधी से हाथ मिला लिये। पार्टी कर्यकर्ता मानते है कि कांग्रेस से हाथ मिलाने से सपा को हार का मुंह देखना पड़ा है। अगर ऐसा नहीं होता तो प्रदेश में दोबारा सपा की ही सरकार बनती। सपा के मुकाबले कांग्रेस को कम नुकसान हुआ है। प्रदेश में कुछ खास प्रभाव नहीं है। राहुल गांधी की प्रदेश भर में खाट पर चर्चा से प्रदेश के कार्यकर्ताओं एक बार जोश जरूर देखने को मिला था। लेकिन सपा से गठबंधन से उनका जोश भी ठंडा पड़ गया।

अब इस बात की हवा गर्म है कि मोदी मैजिक को तोड़ने के लिये बिहार चुनाव जैसा गठबंधन बनाना होगा। इसमें नितीश कुमार को पीएम प्रोजेक्ट करने की बात भी जदयू नेता कर रहे हैं। जदयू नेताओं का मानना है कि यदि यूपी में मायावती ने कांग्रेस-सपा गठबंधन का साथ दिया होता तो चुनाव परिणाम कुछ और ही होते।

यदि 2019 के आम चुनाव में मोदी को रोकना है तो महागबंधन जरूरी हे। इस बात से राजद, वामदल, सपा और क्षेत्रीय दल सहमत दिख रहे हैं। लेकिन कांग्रेस अगला चुनाव राहुल-सोनिया के नाम पर लड़ना चाहते हैं। वैसे वो महागठबंधन के लिये सहमत दिखते हैं। नितीश कुमार के नेतृत्व के नाम पर कोई भी बड़ा कांग्रेसी नेता खुलकर नहीं कहना चाह रहा है।

विनय गोयल के विचार

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