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सुरक्षित एवं आत्मनिर्भर समाज एवं राष्ट्र के निर्माण के लिए ‘ईच वन, टीच वन, ईच डे’ अहम्

नई दिल्ली। सिविल डिफेन्स डायरेक्टर मनीषा सक्सेना ने सुरक्षित एवं आत्मनिर्भर समाज एवं राष्ट्र के निर्माण के लिए ‘ईच वन, टीच वन, ईच डे’ (यानि हर दिन हर व्यक्ति को पढ़ाने) की आवश्यकता पर ज़ोर दिया। उन्होंने संगठन के स्वयंसेवियों के उत्कृष्ट कार्यों तथा समाज के प्रति योगदान की सराहना की। वे ऐसे संगठन का नेतृत्व करते हुए अपने आप को गौरवान्वित महसूस कर रही थीं जो समाज कल्याण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

वे सिविल डिफेन्स के 71वें रेज़िग डे के मौके पर मुख्य अतिथि के रूप में भाषण दे रहीं थी। कार्यक्रम के दौरान इस स्वयंसेवी संगठन के कर्मचारियों ने आपदा राहत ड्रिल्स का प्रदर्शन किया। राजधानी में 1964 में स्थापित सिविल डीफेन्स को 1 जनवरी 2011 से डिविज़नल आयुक्त, दिल्ली के अधिकार क्षेत्र में रखा गया है। इसने 1965 और 1971 के भारत-पाक युद्ध के दौरान भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले सिविल डीफेन्स स्वयंसेवियों को उनके अच्छे कार्यों के लिए सम्मानित किया गया, उन्हें सुबह दुर्घटना पीड़ित की जान बचाने के लिए पुरस्कृत भी किया गया।

दुर्घटना पीड़ित पूर्व ज़िला मजिस्ट्रेट एस एम कटारिया थे। अपने स्वागत सम्बोधन में वरिष्ठ स्टाफ अधिकारी (नागरिक रक्षा) राहुल सूडान ने दिल्ली में नागरिक सुरक्षा गतिविधियों और इतिहास के बारे में जानकारी दी। इस मौके पर नागरिक रक्षा सेवाओं जैसे बचाव, प्राथमिक चिकित्सा, अग्निशमन, कल्याण आदि का प्रदर्शन किया गया। इसके अलावा नागरिक रक्षा गतिविधियों पर आधारित फोटो प्रदर्शनी भी आयोजित की गई। एक मॉक ड्रिल के दौरान हरी ओम शुक्ला (इन्सीडेन्ट कमांडर) और अनिल कुमार माथुर (इन्चार्ज-वार्डन) के नेतृत्व में नागरिक रक्षा टीमों ने अग्निशमन, बचाव कार्यों में लोगों की मदद की, लोगों को आपातकालीन स्थिति से बचाकर बाहर निकाला गया और घायलों को प्राथमिक चिकित्सा दी गईं।

विनय गोयल की रिपोर्ट

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