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खुला खतः सरकार कब जागेगी

मोदी सरकार के तीन साल होने जा रहे हैं। सारे बीजेपी नेता और सरकार उपलब्यिं का ढोल पीट रहे है। उनके चश्मे से देखा जाये तो देश में दूध-दही की नदियां बह रही हैं। देश से अपराधियों का ब्रेन वाश हो गया है। देश में किसान ऐश ओ आराम की जिंदगी जी रहा ह्रै। देश के सभी बेरोजगारों को नौकरियां मिल गयी हैं। खिलाडियों के चयन में शोषण खत्म हो चुका है। ट्रांसफर पोस्टिंग का धंधा खत्म हो गया है। देश में शिक्षा व्यवस्था चाक चौबंद हो गयी है। सरकारी स्कूलों में शिक्षण व्यवस्था ढर्रे पर आ चुका है। व्यवसायियों की चांदी ही चांदी हो गयी है। देश से नक्सलवाद का नाम मिट गया है। कश्मीर में अमन चैन की बंसी बज रही है।
देश में प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षा का स्तर किस हद तक गिर चुका है इसका नमूना राजस्थान, बिहार, हरियाणा और मध्यप्रदेश के बोर्ड परिणामों से जाना जा सकता है। इन चारो प्रदेशों में प्रतिवर्ष 52 से 54 प्रतिशत छात्र फेल हो जाते हैं। सरकारे यह जानने की कोशिश नहीं करती हैं कि इसकी वजह क्या है। सरकारी स्कूलों के अघ्यापकों से जनगणना से मतगणना तक का काम लिया जाता है लेकिन शिक्षण का काम नहीं लिया जाता है। अध्यापनरत शिक्षकों को पढ़ाना नहीं आता है। क्लास में टीचर पहुंच कर प्रॉपर तरीके से पढ़ाते नहीं हैं। सरकारी विद्यालयों में न तो पर्याप्त संख्या में टीचर है और न ही पढ़ने के लिये कमरे। यहां तक कि लड़कियों के विद्यालयों में प्रसाधन केन्द्र हैं। सरकारों के पास इन सब समस्याओं के समाधान करने के लिये न तो समय और न ही कोई दिलचस्पी।

मेरा देश बदल रहा है आगे बढ़ रहा है। यह स्लोगन मोदी सरकार में काफी जोरशोर चर्चा में रहा है। लेकिन क्या वास्तव में देश आगे बढ़ रहा है। देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने भाषणों में अक्सर बेटियों को पढ़ाने और उनको बचाने की बात करते हैं। क्या वास्तव में लोग उनकी बातों को गंभीरता से ले रहे हैं। लेकिन रेवाड़ी की बच्चियों ने ये साबित कर दिया है कि अगर हक न मिले तो आगे बढ़ कर छीन लो। 80 लड़कियों की जिद के आगे हरियाणा सरकार को झुकना पड़ा। रेवाड़ी के हाई स्कूल को सरकार ने अपग्रेड करने का आदेश दे दिया। यहां तक कि हरियाणा के सीएम ने भी इन बच्चियों से मिलने की इच्छा जतायी है। सबसे बड़ी बात यह है कि इन बच्चियों को अनशन पर ही उतरना ही क्यों पड़ा। इन लड़कियों के अनशन से पूरे देश की लड़कियों को एक रास्ता दिखाया है।

हरियाणा के सरकारी हाई स्कूल में पढ़ने वाली 86 छात्राओं ने आगे की पढ़ाई के लिये दस मई से स्कूल के गेट पर ही धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया। तीन चार दिनों तक मीडिया ने कोई तवज्जो नहीं दिया। लेकिन इन लड़कियों के जुनून और जोश के आगे मीडिया ने उनके अनशन को गंभीरता से लेना शुरू कर दिया। इससे प्रशासन व सरकार की कुंभकरणी नींद खुली और छात्राओं की मांग को मानने पर मजबूर हुई। मालूम हो कि इन लड़कियों को आगे की पढ़ाई के लिये गांव से चार किमी. दूर जाना पड़ता है। वहां जाने के लिये बच्चियों को रास्ते में मनचलों की हरकतों का सामना करना पड़ता था। बहुत सी लड़कियों के परिजन आगे की पढ़ाई के लिये राजी नहीं होते थे। साथ ही उन्हें मनचलों की हरकत भी परेशान करती थी।

विनय गोयल के विचार

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