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बसपा का समीकरण बिगाड़ सकते हैं विपक्षी बागी विधायक

उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी (एसपी) और बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) के साथ आ जाने से भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) परेशान है। कहा जा रहा है कि रविवार को हुए लोकसभा की दो सीटों के उपचुनाव में एसपी-बीएसपी गठजोड़ ने बीजेपी के पसीने छुड़ा दिए। यही कारण है कि अब राज्यसभा चुनाव में बीजेपी ने इस गठजोड़ को सबक सिखाने की नीयत से झटका देने का मन बना लिया है।बीजेपी ने सोमवार को समाजवादी पार्टी के राज्यसभा सांसद रहे नरेश अग्रवाल और उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी के विधायक रहे उनके बेटे नितिन अग्रवाल को तोड़ लिया और लखनऊ में एक प्रेस कांफ्रेंस कर दोनों को बीजेपी में शामिल करने का ऐलान कर दिया। इसी प्रेस कांफ्रेंस में नरेश अग्रवाल ने ऐलान कर दिया कि उनके विधायक पुत्र अब राज्यसभा चुनाव में बीजेपी उम्मीदवार को वोट देंगे।इस सियासी कवायद के बाद यूपी से राज्यसभा की 10 सीटों के लिए होने वाले चुनाव दिलचस्प हो गए हैं।

बीजेपी ने नामांकन प्रक्रिया खत्म होने से चंद घंटे पहले एक और उम्मीदवार को मैदान में उतार दिया। इस तरह यूपी से कुल 10 सीटों के लिए होने वाले चुनाव के लिए अब बीजेपी के 9 उम्मीदवार सामने आ गए हैं। बीजेपी ने आखिरी क्षणों में अनिल अग्रवाल से पर्चा भरवाया है। इससे पहले रविवार देर रात बीजेपी ने 7 उम्मीदवारों के नामों का ऐलान कर दिया था। वित्त मंत्री अरुण जेटली के नाम का ऐलान बीजेपी पहले ही कर चुकी थी।राजनीतिक विश्लेषक बीजेपी के इस कदम को एसपी-बीएसपी गठबंधन के तोड़ के तौर पर देख रहे हैं। उनका कहना है कि अगर कांग्रेस और एसपी की तरफ से क्रॉस वोटिंग हो गई, तो बीएसपी के उम्मीदवार भीम राव आंबेडकर का जीतना मुश्किल हो जाएगा।उत्तर प्रदेश में राज्यसभा की एक सीट के लिए किसी भी पार्टी के पास 37 विधायक होने जरूरी हैं। 403 सदस्यों वाली विधानसभा में समाजवादी पार्टी के पास इस वक्त 47 विधायक हैं। ऐसे में एसपी का सिर्फ एक ही उम्मीदवार जीत सकता है। और एसपी जया बच्चन का नामांकन करा चुकी है।

वे चौथी बार राज्यसभा की सदस्य बनेंगी। इसके अलावा बीएसपी के पास 19 विधायक हैं। फिर भी उसने भीम राव आंबेडकर को राज्यसभा सदस्यता के लिए उम्मीदवार बनाया है। माना जा रहा है कि जीतने के लिए जरूरी 37 वोटों के लिए उसे समाजवादी पार्टी और कांग्रेस की मदद मिलेगी। इस तरह भीमराव अंबेडकर के पक्ष में बीएसपी के 19, समाजवादी पार्टी के बचे हुए 10, कांग्रेस के 7 और आरएलडी के एक वोट का सहारा है। विश्लेषकों का कहना है कि अगर बीजेपी ने एसपी और कांग्रेस के विधायकों में सेंध लगा ली तो बीएसपी के लिए मुश्किल हो सकती है।

लखनऊ के सियासी गलियारों में चर्चा है कि एसपी के विधायकों को तोड़ना संभव है, क्योंकि इनमें से कुछ विधायक शिवपाल यादव के करीबी हैं, और शिवपाल यादव जया बच्चन को फिर से राज्यसभा भेजे जाने के फैसले से खुश नहीं हैं। उधर नरेश अग्रवाल के अपने विधायक पुत्र समेत बीजेपी में जाने से भी मुश्किलें हो सकती हैं।अगर बीजेपी का गणित देखें तो यूपी विधानसभा में उसके पास कुल 324 विधायक हैं। 311 उसकी अपनी सीटें हैं बाकी सहयोगी दलों की। ऐसे में 8 उम्मीदवारों को सीधे-सीधे जितवाने के बाद भी उसके पास 28 विधायक बचते हैं। इस तरह उसे एक और उम्मीदवार को राज्यसभा भेजने के लिए सिर्फ 9 विधायक और चाहिए। उत्तर प्रदेश की राजनीति पर नजर रखने वाले कहते हैं कि बीजेपी को 3 निर्दलीय विधायकों का समर्थन मिल सकता है। इसके बाद सिर्फ 6 वोटों की और जरूरत होगी, जो कि कांग्रेस और एसपी के विधायकों को तोड़कर पूरी की जाएगी।

विनय गोयल के विचार

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