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भोजन थाल में जहर ही जहर

नयी दिल्ली। आम तौर पर यह समझा जाता है कि महंगी सब्जी व पफल खरीद कर खाने से हमारी सेहत ठीक रहेगी। ब्रांडेड शोरुम व दुकानों में बिकने वाली गेहूं, चावल, सब्जियां व पफल भी प्रतिबंध्ति रासायनिक तत्वों से अछूते नहीं रह गए हैं। आम तौर पर बाजारों में बिकने वाली सब्जियां-बैंगन, भिंडी, बंद गोभी, पफूलगोभी में भारी मात्रा में प्रतिबंध्ति पेस्टीसाइडों का प्रयोग किया जा रहा है इतना ही नहीं केला सेब व चावल भी इससे अछूते नहीं रह गए हैं।
भारत सरकार के खाद्य सुरक्षा व मानक प्राध्किरण के अध्ययन के अनुसार कुछ अत्यंत अस्वास्थ्य कारी जानकारियां सामने आई है। सामान्य खाद्य सामाग्री में प्रतिबंध्ति रसायन की मात्रा हजार गुणा अध्कि पाई गई है। यह अध्ययन सारे देश में लिए गए नमूने के आधर पर किया गया है। सब्जियों में बैंगन सबसे अध्कि खतरनाक बताया गया है। इसमें हेण्टाक्लोर नामक पेस्टीसाइड की मात्रा 860 प्रतिशत अध्कि पाई गई है जबकि मानकों के अनुसार अनुमन्य मात्रा 48 प्रतिशत निर्धरित है। इसी तरह बंद गोभी व गोभी में क्रमशः 95.5 व 320 पफीसद साइपर मेथरिन और एल्डिरन नामक रसायन की मात्रा पाई जा रही है। भिंडी में भी साइपरमेथरिन की 55 पफीसद मात्रा अध्कि बताई जाती है।
  अब अनाजों की बात करें तो गेहूं चावल में भी प्रतिबंध्ति रासायनों का प्रयोग किया जा रहा है। चावल में क्लोरपेफनिबोस नामक पेस्टीसाइड 1324 प्रतिशत अध्कि मात्रा में पाया गया है। जबकि गेहूं में एल्ड्रिन पेस्टीसाइड की मात्रा 21890 गुुनी अध्कि पाई गई है। पफलों में केले में क्लोरोडेन, सेब में डाई क्लोरवास नामक पेस्टीसाइड उपयोग अनुमन्य मात्रा से बहुत अध्कि जा रहा है।
  दुष्प्रभाव- स्वास्थ्य विशेषज्ञों की राय है कि ऐसे पफलों व सब्जियां का कापफी समय तक नियमित सेवन करनें से मौत तक हो सकती है। इसका दुष्प्रभाव नर्वस सिस्टम, यकृत और गुर्दाें पर भी पड़ता है। इसके अलावा पफूड पोयजनिंग और एलर्जी की शिकायत भी हो सकती है। ऐसे पफल व सब्जियां गर्भवती महिलाओं के लिए अध्कि घातक हो सकती है। डाक्टरों का यह कथन अब झूठा साबित हो रहा है कि एक सेब रोज खाने से स्वस्थ रहा जा सकता है आज सेब व संतरा खाया तो 140 पफीसद अध्कि प्रतिबंध्ति पेस्टीसाइड एल्ड्रिन शरीर में चला जाएगा। इससे कैंसर जैसे जानलेवा रोग भी होने की आशंका रहती है।
  बचाव- अगर हमें इन पेस्टीसाइडस के दुष्प्रभावों से बचना है तो पफलों व सब्जियों को चार पांच बार सापफ पानी से धे लें। पांच दस मिनट नमक के पानी भिगो कर रखें। पफलों व सब्जियों को पोटेशियम पर मैग्निट के घोल में कुछ समय के लिए रखें। पफलों को छील कर खाएं। आर्गनिक पफल व सब्जियां ही खरीद कर सेवन करें। सबसे बेहतर तरीका यह है कि लोग घरों में पफल व सब्जियां अपने आंगन में उगाएं और ताजी सब्जियों का सेवन करें।

विनय गोयल की रिपोर्ट

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