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पत्रकारों पर पुलिस व सरकार का तांडव, गाजियाबाद से पत्रकार विनोद वर्मा गिफ्तार

नयी दिल्ली। साल भर के अंदर कुछ प्रदेशो में आम चुनाव होने जा रहे है। इनमें अधिकतर प्रदेशों में बीजेपी की सरकारें पिछले लगभग डेढ़ दशकों से काबिज हैं। सरकारें लाख दावा करें कि उनके राज्य में चैन की बंसी बज रही है। भय, भूख और भ्रष्टाचार का नामो निशान नहीं है। लेकिन वास्तव में इन प्रदेशों के ग्रामीण इलाकों में बेरोजगारी, बदहाल किसान, गरीबी, भुखमरी, शिक्षा व स्वास्थ्य सेवाओं को बुरा हाल है। यहां रहने वाले चुनींदा पत्रकार बदहाली की असलियत का खुलासा अपनी कलम से कर रहे हैं। ऐसे में ऐसे पत्रकारों पर पुलिस और सरकार का दमन चक्र जोरशोर से चलाया जा रहा है। 5 सितंबर को बंगलुरु में एक महिला पत्रकार गौरी लंकेश की उनके घर के सामने गोलीमार का नृशंस हत्या कर दी जाती है। उनका कुसूर सिर्फ इतना था कि उनकी विचारधारा भाजपा की विचारधारा से मेल नहीं खाती थी। लगभग दो माह बीत गये लेकिन उनके हत्यारों का आजतक पुलिसक को सुराग नहीं लगा है।
ताजा मामला वरिष्ठ पत्रकार विनोद वर्मा का है जिन्हें छत्तीसगढ़ की पुलिस ने उनके गाजियाबाद स्थित आवास से गिरफ्तार कर उनसे घंटों स्थानीय थाने में बैठा पूछताछ की। पुलिस के अनुसार विनोद वर्मा ने रमन सरकार के एक मंत्री की अश्लील सीडी के बल पर अवैध वसूली के लिये दबाव बनाया था। छत्तीसगढ़ के एक जिले से भाजपा के एक कार्यकर्ता प्रकाश बजाज की तहरीर पर पत्रकार के खिलाफ बदनाम करने की धमकी और अवैध वसूली के आरोप में मुकदमा दर्ज कराया गया। मालूम हो कि पिछले एक साल से प्रदेश सरकार की शह पर पुलिस काफी पत्रकारों को फर्जी मुकदमो में फंसाने का प्रयास किया गया कुछ पत्रकारों को जेल भेजने में पुलिस अपने मंसूबों में सफल भी रही है। उत्पीड़न से बचने के लिये पत्रकारों ने एक कमेटी भी की है जिसमें विनोद वर्मा भी मेंबर है।
मालूम हो कि साल डेढ़ साल के भीतर छत्तीसगढ़ में आम चुनाव होने वाले हैं। वहां के पत्रकारों को सरकार अपने पक्ष में करने के लिये हर संभव प्रयास में जुटी है। जो सरकार की हां में हां मिलाने लगे उन्हें तो धन, दौलत और सरकारी सुविधाओं से नवाजा जा रहा है। खिलाफत करने वाले पत्रकारों को झूठे मुदकमे में फंसा कर उनका आर्थिक मानसिक और शारीरिक शोषण किया जा रहा है। विनोद वर्मा ने अपने ट्विीट में लिखा है कि पत्रकारों के खिलाफ छत्तीसगढ़ की सरकार का दमन चक्र जारी है। लेकिन वो हार मानने वालों में से नहीं।

विनय गोयल की रिपोर्ट

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