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राजनैतिक गलियारों से उठकर, क्या प्रथाए बदल पाएंगे राजनेता…

28-29 सितम्बर को हुए सर्जिकल स्ट्राइक के बाद से देश की सियासत गर्माती जा रही हैं। एक ओर पीएम नरेंद्र मोदी को इस ऑपरेशन के लिए बधाईयां मिल रही हैं तो दूसरी तरफ उनसे ऑपरेशन से जुड़े सबूत मांगे जा रहे हैं। देश की सुऱक्षा के मामले को इस तरह बाहर लाना कहीं-न-कहीं राजनैतिक गलियारों में होड़ का विषय बना हुआ है। इंदिरा गांधी के जमाने में और अटल बिहारी वाजपेयी के जमाने में भी ऐसे ऑपरेशन हुए थे मगर इस ऑपरेशन को सरेआम लोगों के सामने लाना चिंता का विषय हैं।

भाजपा सरकार अपने आपको भारतीय सेना के द्वारा किए गए सर्जिकल स्ट्राइक के हीरो बता रहे हैं। आगरा में रक्षामंत्री मनोहर पार्रिकर और गृहमंत्री राजनाथ सिंह के सम्मान में एक कार्यक्रम आयोजित किया गया जिसमें बड़े-बड़े पोस्टर्स और होल्डिंग्स लगाए गए। जिसमें सेना के द्वारा किए गए शौर्य को दरकिनार कर भाजपा के नेताओं को हीरो बताया गया।

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वही केजरीवाल और पी चितंम्बरम् सर्जिकल स्ट्राइक से जुड़े सबूतो की मांग कर रहे हैं। देश की सुरक्षा व्यवस्था में लिए गए कदमों को राजनैतिक गलियारों में उठाना कहीं-न-कहीं वोट बैंक की राजनीति दर्शाता है। हमारे देश के नेता इतने बीमार हो गये हैं कि देश की सुरक्षा को भी वोट के लिए बेचने पर तुले हुए हैं।

एक ओर हमारे देश के अभिनेता जवानों की शहादत पर कह रहे हैं कि किसने बोला था फौज ज्वाइन करने के लिए और दूसरी ओर हमारी मीडिया सर्जिकल स्ट्राइक को ऐसे, लोगो के सामने परोस रही हैं कि देश के नागरिकों को भी संदेह होने लगा है कि सर्जिकल स्ट्राइक हुआ भी हैं या नहीं।

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भारत की मीडिया और पाक मीडिया में अलग से युद्ध छिड़ा हुआ हैं। मीडिया में अभी चारों तरफ केवल सर्जिकल स्ट्राइक का ही मुद्दा छाया हुआ हैं अगर यही पर भारत कोई मैच जीत जाता हैं तो मीडिय़ा मे केवल मैच-मैच छाया रहेंगा। देश में और भी मुद्दे हैं मगर हमारा मीडिया जब से औद्योगिक जगत से जुड़ा हैं तब से इसकी कीमत खत्म होने लगी हैं, वरना एक दौर ऐसा भी था जब अखबार में किसी के खिलाफ एक लेख छप जाता था तो वो खुद को बेआबरू समझने लगता था।

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आज से पहले भी सर्जिकल स्ट्राइक जैसे ऑपरेशन हुए हैं मगर इस बार का ऑपरेशन चुनावी होड़ बनता जा रहा हैं। एक तरह पीएम मोदी कहते हैं कि सर्जिकल स्ट्राइक के दौरान बनाया वीडियो राजनैतिक नहीं रणनीतिक था। दूसरी ओर केजरीवाल के दिए एक बयान को इतनी महत्वता दी जा रही हैं कि किसी-न-किसी रैली में इसका जिक्र किया जा रहा हैं। यूपी की गलियारों में तो भाजपा नें जमकर प्रचार-प्रसार किया हैं। ऐसे में हमारी मीडिया सत्य को दरकिनार कर टीआरपी बटोरने का काम कर रही हैं।

क्या देश में इस वक्त और कोई समस्या नही हैं?  अरे राजनेता साहब जरा राज्य के किसी भी गांव की तरफ एक बार पहल करके देखिए तो सही, आपको समस्याएं ही समस्याएं नजर आएंगी। साहब देश की साक्षरता दर तो आप गिना रहे हो मगर जाकर तो देखे गांवों के स्कूलों का हाल क्या है। शिक्षक हैं तो बच्चे नहीं और अगर बच्चे है तो शिक्षक का कुछ अता-पता नहीं।

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अगर हमारे राजनेता ऐसी समस्याओं पर ध्यान देने लगे तो वो दिन दूर नहीं जब भारत भी अपना सीना चौड़ा करके विकसित देशों की कतार में शान से खड़ा हो सकेगा। आखिर क्या हमारे नेता अपनी सियासत से ऊपर उठकर इन समस्याओं की तरफ ध्यान दे पाएंगे। क्या यह बदलाव हो पाएगा…ये तो आने वाला वक्त ही बताएगा ?

लेखक अनुराग के अपने निजी विचार…

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