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भारतीय लेखकों के विकास से ही फिल्म उद्योग की प्रगतिः आमिर खान

नयी दिल्ली। मेरा विश्वास है कि जब तक स्क्रीन प्ले राइटर्स का सम्मान और रसूख समाज में नहीं होगा तब तक फिल्म उद्योग का विकास संभव नहीं है। आमिर ने इस बात पर गर्व जताया कि आईएससी ने उन्हें इस समारोह में चीफ गेस्ट के रूप में इनवाइट किया है। आमिर मुंबई में हो रहे 5वें इंडियन स्क्रीन राइटर्स कान्फ्रेंस में चीफ गेस्ट के रूप में आमंत्रित किये गये थे। इस कान्फ्रेंस में पद्मश्री अवार्ड से पुरस्कृत विनोद दुआ ने शुरुआत में दो शब्द कहे। इस अवसर पर न्यूटन, सुलेमानी कीड़ा के निदेशक अमित मसूरकर, कालाहांडी व डेल्ही बेली के निदेशक अक्षत वर्मा, डिज्नी इंडिया के सीईओ सिद्धार्थ राॅय कपूर के साथ वरिष्ठ लेखक व सामाजिक ऐक्टिविस्ट अंजुम राजाबाली सम्मेलन के पहले दिन पैनलिस्ट थे। तीन दिवसीय पांचवे सम्मेलन का थीम जहां दिमाग में कोई डर नहीं है। इसके तहत आजकल लेखकों और स्क्रीन राइटर्स की समस्याओं पर चर्चा की जानी थी।

एसडब्लूए एग्जयूटिव कमेटी के सदस्य और संचालक संजय चैहान ने आईएससी की यात्रा के बारे में बताया कि 2006 में हुए पहले सम्मेलन में मात्र 275 लेखकों ले हिस्सा लिया था। लेकिन इस साल सम्मेलन में 800 से अधिक लेखक भाग ले रहे हैं। गुलाम और राजनीति फिल्म की कहानी लिखने वाले अंजुम राजाबाली और आमिर खान की बातचीत का वहां मौजूद लोगों ने लुत्फ उठाया। आमिर ने अपनी उन यादों को ताजा किया कि उन्होंने 2001 में कैसे लगान फिल्म पूरी की क्योंकि शुरुआत में लोगों ने उनकी फिल्म की काफी आलोचना की थी।

विनय गोयल की रिपोर्ट

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