Home / खुला खत / बीजेपी की मंशा पर सवाल
rally bjp

बीजेपी की मंशा पर सवाल

केन्द्र में काबिज मोदी सरकार का दोहरा चरित्र अब धीरे धीरे सामने आने लगा है। एक तरफ सरकार के मंत्री चीनी सामानों के आयात में लगे हैं, वहीं दूसरी ओर उनके सहयोगी संगठन चीनी सामान का बहिष्कार करने के लिये जन आंदोलन चला रहे हैं। दीपावली के दौरान स्वदेशी जागरण मंच और हिन्दूवादी संगठानों ने चीनी सजावटी शो पीस और बिजली के उपकरणों का विरोध जताया और देशवासियों से इन सामानों की खरीद फरोख्त नहीं करने की अपील भी की थी। वाह रे राष्ट्रवाद बीच रुपये की चीनी झालरों की खरीद पर बैन लगाने और उसकी खरीदफरोख्त की बात की जाती है। वहीं ओप्पो औ वीवो के नये फोन खरीदने के लिये पूरे देश में होड़ मच जाती है। ऐसे में राष्ट्रवादियों की अकल घास चरने चली जाती है। सुनने में तो यह भी आ रहा है कि गुजरात के चुनाव प्रचार में भाजपा ने चीन से झण्डे, बैनर, बिल्ले और अन्य सामग्री मंगाई है। विपक्षी पार्टी कांग्रेस इस खरीददारी के बिल भी नेट पर डाला है।

नागपुर में भी मेट्रो बनाने और चलाने का ठेका भी चीनी कंपनी को दिया गया है। ऐसा करके मोदी सरकार अपने भक्तों को क्या संदेश देना चाहते है। भाजपा की सहयोगी संस्था स्वदेशी जागरण मंच ने हाल में ही चीनी सामान खरीदफरोख्त के खिलाफ में देश के अनेक हिस्सों में प्रदर्शन आदि का आयोजन किया जिसमें बीजेपी के नेताओं के साथ साथ सांसदों ने भी हिस्सा लिया। दिल्ली के एक सांसद का लखनऊ प्रदर्शन के दौरान आई फोन 7 और पर्स पर हाथ साफ कर दिया। बीजेपी नेता और सांसद एक तरफ भारतवासियों को चीनी सामानों की खरीदफरोख्त न करने की अपील करते हैं दूसरी खुद ओप्पो और वीवो फोन का इस्तेमाल करने से बाज नहीं आते हैं।

इससे एक बात और भी समझ में आ रही है कि भाषण देने वालों की मंशा सिर्फ उपदेश देना ही होता है। उस पर अमल करना उनके लिये जरूरी नहीं होता है। भक्तगण तो मोदी मोदी करते नहीं थकते वहीं उनके नेता और सरकार उन्हीं चीनी लोगों के साथ बिजनेस डील करने से नहीं चूक रहे हैं। उनके देश में जा कर मंत्रियों व ब्यूरोक्रेट्स मेहमान बनते हैं। एक दूसरे के गलों में बाहंे डाल कर फोटो सेशन कराते हैं। मोदी चीनी राष्ट्रपति को ढोकला फाफड़ा खिलाकर झूला झुलाते हैं। डील पर डी करते जा रहे हैं वहीं बेचारा भक्त सड़क पर रैलियां निकाल कर गला फाड़ कर चीना उत्पादों के खिलाफ पदर्शन करने से बाज नहीं आ रहा है। इससे पार्टी और सरकार की मंशा पर सवाल उठना लाजिमी है।

विनय गोयल की रिपोर्ट

Next9news

Check Also

diwali

सुप्रीम कोर्ट के आदेश को जनता का तमाचा

विनय गोयल के विचार नयी दिल्ली। आजतक हम लोगों को यह भ्रम था कि उच्चतम …