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‘शिवाय’ या ‘सुलतान’ नहीं बल्कि ये हैं असली ‘नायक’

बिहार : अपनी इस रिर्पोट में हम आपको एक असली हीरो की कहानी सुनाने जा रहे हैं। ऐसा हीरो जो असल में नायक हैं, ऐसा हीरो जिसके सामने न शिवाय टिक पाएंगी और न ही सुल्तान। ये एक ऐसी कहानी है जो सुनमें में किसी फिल्म की स्क्रिट की तरह लगती हैं लेकिन इस कहानी का हर पहलू बेहद ही सच्चा है। यहां न तो कोई कल्पना हैं न ही कोई रचना है तो सुनिए कैसे बिहार के आईपीएस अधिकारी एक आम अफसर से नायक बन गए।

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दिल्ली के एक अच्छे खासे परिवार से नाता रखने वाले बिजेनस मैन भाईयों को दिवाली से पहले एक फोन आया, फोन करने वाला एक ऐसा शक्स था जिसे दोनो भाईयों के बारे में बहुत कुछ पता था। उस शक्स ने दोनों में से एक भाई को शाम के समय फोन किया। बहुत साधगी भरी अवाज़ में उस शक्स ने कहा बिहार से गोपाल गोयल बोल रहा हूं। यहां एक पॉलिटेक्निक की फिनिशिंग का काम है, आप आकर देख लें। दोनों कारोबारी भाई यही काम करते थे, हाला कि फोन पर उन्होनें काम के लिए तुरंत हां नहीं कहा और ये कहते हुए फोन रख दिया कि सोच कर बताउंगा।

दोनों की उसी रात आपस में बात हुई और उन्होनें तय किया की अगर कोई बड़ा काम हुआ तो करेंगे और इसी के साथ वो काम देखने दिल्ली से बिहार पहुंच गए। दोनों के लिए एयरपोर्ट पर एक डाइवर खड़ा था, जिसे की उन्हें सही जगह तक पहुचाना था। वो सही जगह भाईयों की नज़र में कुछ और थी और फोन करने वाले शक्स की नज़रो में कुछ और यहां सब कुछ सीधा नहीं था, वो इसलिए क्योंकि उस शक्स ने दोनो भाईयो के अपहरण का पूरा खेल रचा हुआ था।

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योजना के अनुसार उसने और उसके पूरे जत्थे ने किया भी यही। दोनो को किडनैप कर लिया गया। उनपर अनगिनत अत्याचार हुए, खाने-पीने के लिए कुछ दिया तो नहीं जाता था लेकिन नींद के इंजेक्शन से प्रताड़ित जरूर किया जाता। बार-बार उनकी जगह को बदला जाता, ताकि उनकी चीखें कोई पहचान न जाए। दिन में कई बार उन्हें पीटा जाता था। इतना ही नहीं उन्हें छोड़ने के लिए फिरौती के तौर पर मांगी गई 5 करोड़ की बड़ी रकम और यहां शुरू होता है उस नायक का किस्सा जिसका नाम है मनू माहाराज।

किडनैपर्स से भाइयों को छुड़ाने के लिए उन्होंने 100 पुलिसकर्मियों की टीम के साथ करीब 10 घंटे तक जंगल के अंदर 15 किमी पैदल, पहाड़ी रास्ता तय किया और एके 47 के साथ ऑपरेशन के जत्थे को सम्भाला। ऑपरेशन रात 10 बजे शुरू हुआ, जब पूरी टीम एक नदी के पास पहुंची। पहाड़ी पर रेंगते हुए पूरी टीम किडनैपर्स की लोकशन के पास पहुंच ऑपरेशन की शुरूआत की।

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काफी समय तक दोनो तरफ से गोलीबारी हुई। बेहद मशक्कत के बाद दोनों भईयों को सही-सलामत छुड़वा लिया गया। एक अपराधी को पकडने में मनू महाराज और उनकी टीम सफल रही और जब दोनो को घरवालो तक पहुंचाया गया तब वो उन्हें देखते ही उनसे जा लिपटे साथ ही जोर-जोर से रो पड़े। आप खुद इस बात को समझ सकते हैं कि दोनो भाईयों पर किस तरह से कहर ढ़ाए गए होंगे।

खैर आज के दौर में ऐसे कई सुरक्षाकर्मी मौजूद हैं, जो अपनी जान की परवाह किए बगैर हमारी सुरक्षा के लिए तत्पर रहते हैं। हमारा सलाम हैं, उन तमाम रक्षकों को जिनकी वजह से देश सुरक्षित हैं, आप और हम सुरक्षित हैं।

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