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Sad-Shayari

….कोई पास हो कर भी अपना नहीं होता

सब जज्बातों का खेल है बस,
कोई पास हो कर भी अपना नहीं होता।
कोई दूर रह कर भी,
रूह में उतर जाता है।
मेरे चेहरे से मेरे दर्द,
न पहचान पाओगे।
मेरी आदत तो है,
हर बात पर मुस्कराने की।

नेचर और सिग्नेचर बदलते नही ताउम्र
मैं खुश हूं,
कोई मेरी बात को करता है।
बुरा कहता है तो क्या बात है,
वो याद तो करता है।
कौन कहता है कि,
नेचर और सिग्नेचर बदलते नही ताउम्र।
बस एक चोट की जरूरत है,
गर उंगली पर लगे तो सिग्नेचर,
दिल पर लगे तो नेचर बदल जायेगा।

– दीपिका टण्डन

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