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घुटन की दास्तां बहुत पुरानी हैं…

कैसा होता है वो शख्स जिसके पास आप बीती सुनाने के लिए कोई न हो जो अंदर ही अंदर घुट रहा हो किसी न किसी बात को लेकर, कैसा होता होगा वो शख्स जो बहुत कुछ कहना चाहता हैं लेकिन किसी के न होने के डर से बातों को मन में ही दबा लेता हो। क्या बीतती होगी उसके मन पर जो अपने अल्फाजों को समेट कर ही रह जाता है, इस डर से की सच्चाई पता चलेगी तो क्या होगा? किसी को खोने के डर से बातों को मन में ही दबाकर अंदर ही अंदर सिसकता रहता हैं, वो।

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सोशल मीडिया ने हालांकि कुछ हद तक चीजों को आसान कर दिया हैं, अब लग रहा है कि सोशल मीडिया का इस बात से क्या लेना देना, ऐसे लोगों का सोशल मीडिया के साथ बेहद गहरा संबंध है, इस बात में कोई दोराय नहीं है कि सोशल मीडिया में कई खामियां हैं, जिसका खामियाजा भी लोगों को भुगतना पड़ता हैं लेकिन इस बात में भी कोई शक नही है कि सोशल मीडिया, एक जरिया बन गया है अपने मन के बोझ को हल्का करने का।

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जो बात इंसान आम तौर पर किसी के साथ साझा करने के लिए साहस नहीं जुटा पाता, वो आपको फेसबुक के किसी Confession पेज पर पढ़ने को मिल जाएगी या फिर वो इंसान अपनी बातों को किसी डायरी में समेट कर खुद को सात्वना देने का प्रयास करता हैं। इन बातो की सच्चाई की पुष्टि तो हम नहीं कर सकते लेकिन हां इतना जरुर है कि उनमें से कुछ लोगों की दास्तां ये सोचने पर मजबूर कर देती हैं कि चलो इन्होंने Confession पेज  के जरिए अपनी कहानी को बया तो किया।

कहीं पता चलता है कि कोई एक बेटी अपनी मां की दास्ता सुनाती हैं। किस तरह उसकी मां सिर्फ और सिर्फ उसकी पढ़ाई के लिए पिता की जिल्लत सहन कर रही हैं तो वहीं एक लड़की बताती हैं कि किस तरह से बचपन में उसके अपने ही सगे संबंधी ने उसके साथ छेड़खानी करने की कोशिश की और बचपन में ऐसे जख्म दिए जिसके साथ वो आज भी शर्मिंदगी से जी रही हैं।

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ऐसी अनेक कहानियां आपके Confession पेजेस पर मिल जाएगी जो लोगों की मनोस्थिति को दर्शाएगी, हालातों को बयां करेंगी साथ ही वो ये भी दर्शाती हैं कि किस तरह से ये पेज ही उनके दिल के दर्द की एक दवा है। तो वहीं कुछ लोग जिन्दगी भर खुद के दर्द को अंदर ही समाकर रखना चाहते हैं, वो चाहते हैं उनका ये दर्द किसी के सामने न आए लेकिन वहीं लोग जब ऐसे किसी दर्द को किसी अन्य के साथ घटित होते हुए देखते हैं, तो उनकी आप बीती को समाप्त करने का प्रयास करते हैं। सवाल बस इतना सा कि आखिर जिंदगी भर इन लोगों ने ऐसा क्या हासिल किया की दर्द को खुद के जेहन में संभालकर रखने के सिवा उनके पास और कोई जरिया नहीं रहा? जरा सोचिए? सवाल करिए खुद के जेहन से?

लेखक चीनू सेहरावत के अपने निजी विचार…

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