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Tag Archives: think writer think

ज़िन्दगी में कामयाबी की ऊंचाई पाने के लिए दूसरों को गिराना ज़रूरी नहीं

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  दोस्तों, आज हमारी ज़िन्दगी में हम इंसानों की मानसिकता और सोच इस तरह की बन चुकी है कि हम अपनी ज़िन्दगी में कामयाबी की ऊंचाइयो को पाने के लिए दूसरे को गिराना ज़रूरी समझते हैं,  अपनी जीत से ज़्यादा दूसरों को हराना ज़रूरी समझते हैं। दरअसल, आज यही सोच …

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अलेप्पो : एक शहर जो बर्बाद हो गया….

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एक शहर जो कभी वर्ल्ड हेरिजेट सेंटर  में शुमार था, वो आज बर्बादी की ऐसी कगार पर पहुंच चुका हैं जहां लोगों को अपनी जान बचना भी मुश्किल हो गया है। कुछ साल पहले तक लोग इस शहर की सभ्यता और संस्कृति की मिसालें दिया करते थे, मगर आज यहां …

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केंद्रीय गृह राज्यमंत्री की भाषा का ऐसा स्तर

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भाषा का स्तर उस वक्त भद्दा हो जाता है जब अमूमन हम लोग गुस्से में होते हैं और अनाप-शनाप बातें बोलने लगत हैं, मगर क्या अपशब्द बोलकर ही अपने गुस्से को जाहिर किया जा सकता है। हो सकता है कि गाली-गलौज करके या फिर भद्दे शब्द बोलकर हमारे दिल का …

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सोच का दायरा आखिर बनता क्यों हैं?

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कहने को तो लोग बड़े ही गर्व से कह देते हैं कि वो 21वीं सदी में रहते है, मगर क्या कभी किसी ने इस बात पर गौर किया है कि भले ही हम 21वीं सदी में रह रहे हो लेकिन आज भी कुछ लोगों की सोच हमे सोचने पर मजबूर …

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नोटबंदी कालेधन का समाधान या फिर कालेधन पे सवाल

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8 नवम्बर से पहले किसी ने सोचा नहीं था की उनके पास जो पैसा है वह आने वाले दिनों में उनकी परेशानी का सबब बनने वाला है, और काला धन को रखने वालों के यहां तो जैसे भूचाल आ गया। प्रधानमंत्री का यह फैसला काले धन को रोकने के लिए …

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कैशलेस सिस्टम एक समस्या या फिर हल?

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कैशलैस में समस्या नही, समस्या कैशलैस के तरीके में है। जनता तो आज कैशलैस होने को तैयार है, समस्या तो साधनों की उपलब्धता की है। दिल्ली मैट्रो इसका बे-जोंड उदाहरण है, मैंट्रो की लाईन की दिक्कत से उबरने के लिए लोगों ने तुरंत मैट्रो कार्ड का विकल्प चुना। जबकि होना …

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विश्व भाषा का मिथक एवं लोकतंत्र

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लोकतंत्र में शासन में जनता की सहभागिता तभी आ सकती है जब शासन व्यवस्था जन-भाषाओं में संचालित हो। इंग्लैड़ समेत सम्पूर्ण यूरोप में लोकतंत्र के विकास के साथ वहाँ की जनभाषाएं शासन प्रशासन और शिक्षा का हिस्सा बनी। यूरोप में भी जब आम जन ने प्रोटेस्टेंट मूवमेंट के द्वारा न …

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घुटन की दास्तां बहुत पुरानी हैं…

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कैसा होता है वो शख्स जिसके पास आप बीती सुनाने के लिए कोई न हो जो अंदर ही अंदर घुट रहा हो किसी न किसी बात को लेकर, कैसा होता होगा वो शख्स जो बहुत कुछ कहना चाहता हैं लेकिन किसी के न होने के डर से बातों को मन …

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शहादत देश के लिये…

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देशभक्ति की राह में शहीदों की शहादत याद रखना, देश के लिये शहीद जवानों का सम्मान रखना, भारत मां की चाह में कुर्बानी दे दी याद रखना, देशभक्ति की राह में शहीदों की शहादत याद रखना। देशभक्ति में वीर जवानों का सम्मान याद रखना, खुशियों का दीप जलाकर क्रांतिकारी मान …

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लाचार मम्मा की उम्मीद…

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गोधुली बेला में चला गया, खेल खेलने टोली सूरज चाचा चले गये तो, लगा डराने टोली, चंदा मामा निकल गये फिर, लगा झूमने टोली ढूंढते-ढूंढते मम्मा पहुंची, बोले प्यार की बोली, गले लगाके मम्मा, देखन चाहे मुखड़ा चोरी मम्मा की ममता प्यार से, बोले प्य़ारी बोली, समझ ना आया क्यों …

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